जयपुर: पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि आज देश में संविधान और लोकतंत्र खतरे में है. लोकतंत्र और संविधान को बचाने की जिम्मेदारी केवल विपक्षी दलों की ही नहीं जनता की भी है. उन्होंने कहा कि जब तक जनता एकजुट होकर विपक्ष के साथ नहीं आएगी, तब तक देश में भाजपा और आरएसएस की दादागिरी चलती रहेगी और लोगों को इसका परिणाम भुगतना पड़ता रहेगा. गहलोत ने बुधवार को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि देश में भाजपा संविधान और लोकतंत्र की धज्जियां उड़ा रही है. एजेंसियों का दुरुपयोग हो रहा है. इस दौरान टोंक से आए एक पीड़ित परिवार ने गहलोत से मुलाकात की. अपनी दास्तां सुनाते हुए पीड़ित फूट-फूट कर रोने लगा.
एजेंसियों का हो रहा दुरुपयोग: उन्होंने कहा कि बिहार में चुनाव आयोग दबाव में काम कर रहा है और लाखों लोगों के नाम वोटर लिस्ट से काटे जा रहे हैं. अगर स्वतंत्र संस्थाएं इस तरह दबाव में काम करेंगी, तो फिर लोकतंत्र कैसे चलेगा. राहुल गांधी लगातार इस मामले में लोगों को आगाह कर रहे हैं. जनता को भी अब समझ में आना चाहिए कि देश में क्या हो रहा है.
समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता संविधान की मूल भावना: गहलोत ने कहा कि समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता संविधान की मूल भावना है, लेकिन आरएसएस और भाजपा के लोग इसे संविधान से हटाना चाहते हैं. जबकि सुप्रीम कोर्ट भी कह चुका है कि यह संविधान की मूल भावना है. डॉ अंबेडकर ने जब संविधान बनाया था, उसमें यही भावना आई थी. लेकिन जो आज लोग इन दोनों शब्दों को संविधान से हटाने की बात कर रहे हैं, उनकी मानसिकता क्या है, सभी को पता है. यह लोग हिंदू राष्ट्र की बात कर रहे हैं, देश का लोकतंत्र खत्म करने की बात कर रहे हैं.
कांग्रेस का स्टैंड क्लियर: वहीं उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे को लेकर गहलोत ने कहा कि इस मामले में कांग्रेस का स्टैंड क्लियर है. लोग चर्चा करते हैं कि कांग्रेस पहले तो अविश्वास प्रस्ताव लेकर आई थी और कांग्रेस ने ही इनकी शिकायत की थी. अब ऐसा क्या हो गया कि कांग्रेस इनके पक्ष में खड़ी है. एआईसीसी का भी स्टैंड क्लियर है कि लोकसभा हो राज्यसभा हो या विधानसभा हो, स्पीकर के रूप में हो हमेशा विपक्ष को इसकी शिकायत रहती है. विपक्ष चाहता है कि हमें ज्यादा टाइम मिले. स्पीकर बनने के बाद कई लोगों का झुकाव अपनी पार्टी की तरफ रहता है, जो ठीक नहीं है. उन्होंने सीपी जोशी और परसराम मदेरणा का हवाला देते हुए कहा कि यह दोनों भी विधानसभा के अध्यक्ष थे, लेकिन पूरी तरह से निष्पक्ष रहे.
अचानक कैसे दिया इस्तीफा?: गहलोत ने कहा कि कांग्रेस की शिकायत यह है कि जिस प्रकार से उपराष्ट्रपति का इस्तीफा हुआ है, वह ठीक नहीं है. मुझे भी लगता है कि उनका स्वास्थ्य बिल्कुल ठीक था. दिनभर काम किया. अचानक क्या हुआ कि शाम को उनका इस्तीफा हो गया और पूरा देश चौंक गया. जगदीप धनखड़ रहना चाहते थे या नहीं रहना चाहते थे, इस बारे में बीजेपी हाईकमान और आरएसएस को पता है, लेकिन इसका दूसरा रास्ता भी निकल सकता था.
‘दैवीय शक्ति हटा सकती है’: गहलोत ने कहा कि जगदीप धनखड़ ने कहा था कि वे 2027 तक उपराष्ट्रपति रहेंगे. कोई दैवीय शक्ति ही आ जाए, तो अलग बात है. अभी 15 दिन पहले भी उन्होंने यही कहा था कि वो 2027 तक उपराष्ट्रपति रहेंगे. तो फिर अचानक क्या कारण रह गया जो उन्हें इस्तीफा देना पड़ा. जगदीप धनखड़ मेरे पुराने मित्र हैं. हमारे बचपन से पारिवारिक संबंध हैं, लेकिन जिस तरह से उनका इस्तीफा हुआ है, वह ठीक नहीं है. इससे पहले प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में पूर्व विधानसभा स्पीकर परसराम मदेरणा की जयंती पर गहलोत ने उन्हें याद किया. उनके चित्र पर पुष्प अर्पित किए.
गहलोत के सामने फूट-फूट कर रोने लगा पीड़ित: कार्यक्रम के बाद गहलोत के सामने बुधवार को टोंक से आया एक पीड़ित परिवार फूट-फूट कर रोने लगा. पीड़ितों का कहना था कि जमीन के मामले को लेकर दूर के ही रिश्तेदारों ने खूब मारपीट की, बंधक बनाया. लेकिन रिपोर्ट करने के बावजूद भी पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही है. एक महीने से ज्यादा का समय हो गया है. गहलोत ने पीड़ितों को ढांढस बंधाया और कहा कि मैं इस पूरे मामले में एसपी से बात करूंगा और कार्रवाई के लिए कहूंगा. पूर्व मुख्यमंत्री ने पीड़ितों की फरियाद ली और जल्द से जल्द उन्हें इंसाफ दिलाने का आश्वासन भी दिया.
पूर्व मुख्यमंत्री को बताई आपबीती: दरअसल प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में गहलोत प्रेस ब्रीफिंग दे रहे थे. इसके बाद टोंक जिले के मालपुरा तहसील के गांव देवर निवासी पीड़ित एसएन शर्मा और रंगलाल रोने लगे. इस पर गहलोत ने उनकी परेशानी पूछी. उन्होंने कहा कि उनके पास 5 बीघा जमीन थी. परिवार के ही दूसरे सदस्यों की नजर है. इसके बाद पीड़ित परिवार ने अपनी पूर्व मुख्यमंत्री को बताई. पीड़ित एसएन शर्मा ने मीडिया को बताया कि करीब 1 महीने पहले परिवार के दूसरे सदस्यों ने हमारे परिवार को बंधक बना लिया. महिलाओं बच्चों के साथ भी मारपीट की. इसकी शिकायत पुलिस में की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई.




















