दिल्ली हाई कोर्ट ने फिल्म ‘उदयपुर फाइल्स: कन्हैया लाल दर्जी हत्याकांड’ की रिलीज पर रोक लगा दी है। इस फैसले के बाद कन्हैया लाल के बेटे ने कहा कि उनके पिता की मौत पर बनी फिल्म पर तीन दिन में प्रतिबंध लगा दिया गया, जबकि उनके हत्यारों को तीन साल बाद भी सजा नहीं मिली है।
कन्हैया लाल की हत्या पर बनी यह फिल्म 11 जुलाई को रिलीज होने वाली थी। समाचार एजेंसी एएनआई ने कन्हैया लाल के बेटे यश साहू के हवाले से कहा कि वीडियो साक्ष्य और अन्य सभी चीजें होने के बावजूद पिछले तीन वर्षों से अपराधियों को सजा नहीं किया गया है। और जब कोई फिल्म के माध्यम से देश को सच्चाई दिखाना चाहता है तो एक पूरा संगठन इसके लिए आगे आ जाता है। केवल तीन दिनों के भीतर फिल्म पर रोक लगा दी जाती है। लेकिन, जब किसी मामले में अपराधियों को दंडित किया जाना होता है तो ऐसा नहीं होता।
फिल्म पर हाई कोर्ट का स्थगन अस्थायी है। यह तब तक प्रभावी रहेगा जब तक केंद्र केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) द्वारा दिए गए प्रमाणन के खिलाफ जमीयत उलेमा-ए-हिंद के पुनरीक्षण आवेदन पर फैसला नहीं ले लेता। वहीं, फिल्म निर्माता अमित जानी ने कहा कि वह इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे।
उन्होंने एएनआई को बताया, “हमने यह फिल्म उनके वकील कपिल सिब्बल को दिखाई थी। स्क्रीनिंग के बाद भी उन्हें इसका विरोध करना पड़ा क्योंकि उन्होंने इसके लिए फीस ली थी। आज हाई कोर्ट ने कहा कि इस फिल्म पर फिलहाल रोक लगाई जा रही है। हम इस फैसले को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट जा रहे हैं। उन्हें केंद्र सरकार के पास जाने के लिए कहा गया है और सरकार सात दिनों के भीतर फैसला सुनाएगी कि फिल्म सही है या गलत।”
दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस अनीश दयाल की खंडपीठ ने ‘उदयपुर फाइल्स’ मामले में अंतरिम आदेश पारित करते हुए फिल्म की रिलीज पर रोक लगा दी है। यह आदेश तब आया जब कोर्ट दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। इनमें से एक जमीयत उलेमा-ए-हिंद की है और दूसरी पत्रकार प्रशांत टंडन की। इन याचिकाओं में फिल्म को प्रमाणन देने के सीबीएफसी के फैसले को चुनौती दी गई थी।
याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि फिल्म की रिलीज सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ सकती है। विषय की संवेदनशील प्रकृति को देखते हुए सार्वजनिक व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है।
इस पर कोर्ट ने कहा कि चूंकि याचिकाकर्ताओं को सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 के तहत पुनरीक्षण उपाय का सहारा लेने का अधिकार दिया गया है। इसलिए अंतरिम राहत के उनके आवेदन पर निर्णय होने तक फिल्म की रिलीज पर रोक लगा दी जानी चाहिए। पीठ ने कहा, “हम प्रावधान करते हैं कि जब तक अंतरिम राहत देने पर निर्णय नहीं हो जाता तब तक फिल्म की रिलीज पर रोक रहेगी।”
यह फिल्म राजस्थान के उदयपुर में दर्जी कन्हैया लाल की 2022 में हुई हत्या पर आधारित है। उनकी दिनदहाड़े दो लोगों ने बेरहमी से हत्या कर दी थी। बताया जाता है कि पूर्व भाजपा प्रवक्ता नूपुर शर्मा के समर्थन में सोशल मीडिया पर की गई एक पोस्ट का समर्थन करने से एक खास समुदाय के लोग उनसे नाराज हो गए थे।




















