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ॐ जीवन का मूल मंत्र क्यों है? उच्चारण से हो जाता है कई रोगों का नाश, चमत्कारी हैं इसके फायदे

ओंकार ध्वनि ॐ को दुनिया में जितने भी मंत्र है उन सबका केंद्र माना गया है. ॐ शब्द के उच्चारण मात्र से शरीर में एक सकारात्मक उर्जा प्रवाहित होती है.यही कारण है कि ओम उच्चारण तन और मन दोनों को फिट रखने में उपयोगी है. चलिए जानते हैं ओम के फायदे और इसे चैंट करने के नियम.

ओम (ॐ) को ब्रह्मांड की ध्वनि कहा जाता है.भक्ति और साधना का मूल मंत्र कहा जाता है,यहां तक ओम के बिना की शिव की भक्ति की कल्पना भी नहीं की जा सकती. ओम के उच्चारण से तन ही नहीं मन भी स्वस्थ हो जाता है.ओम की महत्ता का जितना गुणगान किया जाए वो कम है.

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ओम शब्द के उच्चारण से कई शारीरिक, मानसिक और आत्मिक लाभ

ओम शब्द के उच्चारण से कई शारीरिक, मानसिक और आत्मिक लाभ मिलते हैं. मात्र एक ओम शब्द के उच्चारण से आप तन और मन दोनों की शुद्धि कर सकते. सैकड़ों रोगों को दूर भगा सकते हैं. तन और मन की व्याधियों से मुक्ति पा सकते हैं.आज हम आपको आपको ओम उच्चारण के फायदे और उसका सही तरीका और सही समय भी बताएंगे.

ओम का उच्चारण कैसे डालता है प्रभाव

ॐ के उच्चारण से शरीर के अंगों मे कंपन शुरू हो जाती है जैसे की अ:- शरीर के निचले हिस्से में उ शरीर के मध्य भाग में ..म से शरीर के ऊपरी भाग कंपन का संचार होता है. ॐ शब्द के उच्चारण से कई शारीरिक, मानसिक, और आत्मिक लाभ मिलते हैं. इन फायदों को सिर्फ भारत ही नहीं दूसरे देश भी मान गए है. आध्यात्म ही नहीं विज्ञान भी ओम की शक्ति को नकार नहीं पाया है.

हारमोन और च्रकों पर प्रभावी

तप और ध्यान की गहन अवस्था में शरीर के भीतर और बाहर दोनो में इसे सुनने से मन और आत्मा शांती महसूस करती है.ओकांर की ध्वनि जब शरीर के सभी चक्रों और हारमोन स्राव करने वाली ग्रंथियों से टकराती है. तो ग्रंथिंयों के स्राव को नियंत्रित करती है. लिहाजा इसके जाप मात्र से आप निरोगी हो सकते हैं.

तनाव की रामबाण दवा

अगर आप तनाव में हैं. छोटी-छोटी बातों पर परेशान होते हैं, या किसी मानसिक बीमारी से जूझ रहे हैं, तो ओम चैंटिंग आप के लिए रामबाण इलाज है. अब आपको बतातें हैं ओम के फायदे और इसका उचित समय तो ॐ का उच्चारण कब और कैसे करें ये जान लीजिए.

कब करें,कैसे करें चैंटिग

रोजाना प्रातः उठकर पवित्र होकर किसी शांत स्थान पर आसन लगा लें.ओंकार ध्वनि का उच्चारण करें. ॐ का उच्चारण पद्मासन, अर्धपद्मासन, सुखासन, वज्रासन में बैठकर कर सकते हैं.

इसका उच्चारण 5, 7, 11, 21,108 बार अपने समयानुसार कर सकते हैं.

इसका उच्चारण वैसे तो आप किसी भी वक्त कर सकते हैं लेकिन सूर्योदय और सूर्यास्त के समय इसका जाप उपयुक्त माना जाता है.

ओम उच्चारण के फायदे

ओम के जाप से एकाग्रता आती है और स्मरण शक्ति का विकास होता है.

इससे शरीर और मन को एकाग्र करने में मदद मिलती है

दिल की धड़कन और रक्तसंचार व्यवस्थित होता है.

मानसिक बीमारियाँ दूर होने लगती हैं.

ॐ का उच्चारण से थायरायड ग्रन्थि पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है लिहाजा थायराइड को कंट्रोल करने में मदद मिलती है.

ॐ के उच्चारण से दिल के रोग भी पास नहीं भटकते.

पाचन तंत्र नियंत्रण में रहता है.

नींद ना आने की समस्या से निजात मिलती है.

ब्लडप्रेशर और डायबिटीज में भी ॐ का उच्चारण फायदा देता है.

वैज्ञानिकों ने माना है कि ओम के उच्चारण से तन और मन पर सकारात्मक प्रभाव होता है.

शरीर की मृत हुई कोशिकाएं भी इसके जाप से दोबारा जन्म लेने लगती हैं.

इससे महिलाओं की इफर्टिलिटी भी दूर होती हैं.

इसका उच्चारण करने वाला और इसे सुनने वाला दोनों ही लाभांवित होते हैं.

ॐ का उच्चारण रोज़ करने से परिवर्तन आप खुद महसूस करेंगे.

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