राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता अशोक गहलोत ने महाराष्ट्र में चल रहे मराठी-हिंदी भाषा विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। जयपुर में मीडिया से बात करते हुए गहलोत ने इस मुद्दे को हल्के अंदाज़ में लेते हुए कहा कि भारत एक विशाल देश है, जहां अलग-अलग धर्म, जाति और भाषाएं एक साथ रहती हैं। ऐसे में विवाद तो होते रहेंगे, लेकिन समाधान भी निकलते रहेंगे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस तरह की चर्चाएं कोई नई बात नहीं हैं और ये सामाजिक व राजनीतिक एजेंडों का हिस्सा हैं।
‘राजनीति और समाज का खेल है ये’
गहलोत ने अपने बयान में सियासी और सामाजिक पहलुओं को भी छुआ। उन्होंने कहा, ‘हर समुदाय और भाषा के अपने हित हैं, अपने एजेंडे हैं। कुछ लोग इसे राजनीतिक रंग देना चाहते हैं, तो कुछ सामाजिक मुद्दा बनाते हैं। लेकिन ये सब हमारे देश की विविधता का हिस्सा है।’ गहलोत का ये बयान उस समय आया है, जब महाराष्ट्र में मराठी और हिंदी भाषा को लेकर बहस गर्म है।
क्या है पूरा विवाद?
महाराष्ट्र में मराठी और हिंदी भाषा को लेकर विवाद हाल ही में तब शुरू हुआ, जब मनसे (महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना) के कार्यकर्ताओं ने एक दुकानदार को कथित तौर पर इसलिए पीटा, क्योंकि उसने मराठी में बात नहीं की। इस घटना ने स्थानीय और गैर-मराठी भाषी समुदायों के बीच तनाव पैदा कर दिया। समाजवादी पार्टी के नेता अबू आजमी ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मराठी न बोलने की वजह से किसी को पीटना गलत है और इसके बजाय मराठी सिखाने के लिए स्कूल खोले जाने चाहिए।




















