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80 साल पहले खुदाई में निकला था रहस्यमयी शिव मंदिर, अब धराली त्रासदी में दोबारा समाया; पांडवों से भी रहा है इसका कनेक्शन

धराली में आई आपदा ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है. खीरगंगा से आए मलबे में दबने से 5 लोगों की मौत हो गई. 100 लोग अभी भी लापता हैं. हालांकि, 130 लोगों को रेस्क्यू टीमों ने सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया है. अभी भी सेना, ITBP, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और दमकल विभाग के जवान अपनी जान की बाजी लगाकर हर्षिल के धराली गांव में रहने वाले लोगों को बचाने में जुटे हैं. इस त्रासदी में घर, होटलों और दुकानों से लेकर एक मंदिर भी मलबे में दब गया है. इस ऐतिहासिक मंदिर का नाम कल्प केदार है, जिसकी कहानी काफी दिलचस्प है.

स्थानीय लोगों का दावा है कि यह मंदिर बेहद प्राचीन है. इस मंदिर का वास्तु शिल्प केदारनाथ धाम से मिलता जुलता है. इसलिए इसका नाम कल्प केदार है. लोगों का कहना है कि जिस तरह केदारनाथ धाम के बारे में कहा जाता है कि यह मंदिर वर्षों बर्फ में दबा रहा उसी तरह कल्प केदार मंदिर भी किसी आपदा की वजह से जमीन में दबा रहा था.

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साल 1945 में खुदाई के बाद सामने आया मंदिर

कुछ लोग तो इसे महाभारत काल से भी जोड़ते हैं लेकिन Tv9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता. लोगों का कहना है कि इस प्राचीन मंदिर में दर्शन-पूजन 19वीं सदी से होने लगा. ऐसा दावा है कि 1945 में बहाव कम होने पर लोगों ने खीर गंगा के किनारे मंदिर के शिखर जैसी संरचना को देखा तो जगह की खुदाई की गई. कई फुट जमीन की खुदाई के बाद एक प्राचीन शिव मंदिर निकला जिसकी बनावट केदारनाथ मंदिर जैसी थी.

मंदिर के गर्भगृह में आता था खीरगंगा नदी का जल

स्थानीय लोगों का दावा है कि पहले भी खीर गंगा ने मंदिर को अपनी चपेट में लिया था. साल 1945 में खुदाई के बाद मंदिर के निकलने के बाद पूजा शुरू हुई थी. खुदाई के बाद भी मंदिर धरातल से नीचे ही था. श्रद्धालु नीचे जाकर मंदिर में पूजा-पाठ करते थे. लोगों का कहना है कि मंदिर के गर्भगृह में जहां शिवलिंग स्थापित वहां अक्सर खीरगंगा का जल आ जाता था. लोगों ने मंदिर में जाने के लिए मिट्टी निकालकर रास्ता बनाया था जो एकबार फिर मलबे में दब गया है.

अंग्रेज यात्री ने किया था साल 1816 में इसका जिक्र

यदि धराली के प्राचीन मंदिरों की बात करें तो सन 1816 में गंगा भागीरथी के उद्गम की खोज में निकले अंग्रेज यात्री जेम्स विलियम फ्रेजर ने अपने वृत्तांत में इनका जिक्र किया है. जेम्स विलियम फ्रेजर ने धराली के मंदिरों में विश्राम करने का जिक्र किया है. इसके बाद सन 1869 में गोमुख तक पहुंचे अंग्रेज फोटोग्राफर और खोजकर्ता सैमुअल ब्राउन ने धराली में तीन प्राचीन मंदिरों की तस्वीरें भी ली थीं, जो पुरातत्व विभाग के पास सुरक्षित हैं.

क्या आदि शंकराचार्य ने करवाया था इसका निर्माण?

मंदिर का वास्तु शिल्प कत्यूर शैली का बताया जाता है. मंदिर का गर्भ गृह गृह प्रवेश द्वार से कई मीटर नीचे बताया जाता है. मंदिर के बाहर पत्थरों पर नक्काशी थीं. गर्भगृह का शिवलिंग केदारनाथ मंदिर की तरह ही नंदी की पीठ जैसी आकृति वाला है. मंदिर की स्थापना को लेकर अलग-अलग दावे हैं. कुछ लोग इसका निर्माण भी आदि शंकराचार्य द्वारा कराए जाने की बात कहते हैं. तो कुछ का कहना है कि यहां स्थित शिवलिंग की स्थापना पांडवों ने की थी जब वे केदारनाथ आए थे.

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