जयपुर : इस साल दीपोत्सव के मौके पर जयपुर और अयोध्या नगरी रोशनी के तार में जुड़ेंगे. यह वह खास मौका होगा जब छोटी काशी में तैयार दीपक श्री राम की वनवास से वापसी के अवसर पर अयोध्या नगरी की गली-गली को रोशन करेंगे. इस काम के लिए जयपुर की सांगानेर स्थित पिंजरापोल गौशाला को आर्डर मिला है. दीपावली के मौके पर 5 लाख दीपक यहां तैयार किए जाएंगे. इसके लिए 10 और गौशालाओं को भी साथ में जोड़ा गया है.
रोजाना 25 हजार दीपक बनाने का लक्ष्य : पिंजरापोल गौशाला में संचालित वैदिक औषधीय पादप केंद्र अध्यक्ष अतुल गुप्ता ने बताया कि हाल में श्री रामलला अयोध्या सेवा समिति अध्यक्ष डॉ. आचार्य राजानंद शास्त्री ने गौशाला पहुंचकर गाय के गोबर से बन रहे दीपक के काम का जायजा लिया था. गुप्ता ने बताया कि इस विशेष प्रकार के दीपक को तैयार करने के लिए महिला कलाकारों की टीम दिन-रात मेहनत कर रही है. सहायता समूह की 11-11 महिलाओं के पांच समूह इस काम में जुटे हैं. इन 55 महिलाओं का लक्ष्य रोजाना 25000 दीपक तैयार करने का है.
इस बार गोमय दिवाली का पैगाम : अतुल गुप्ता कहते हैं कि आज पूरे देश में लोकल फॉर वोकल का पैगाम दिया जा रहा है. ऐसे में दीपोत्सव जैसे त्योहार पर दीपक के माध्यम से स्वदेशी का संदेश दिया जा सकता है. उन्होंने इस कार्य के पीछे भी इसी तरह की सोच रखी है. गुप्ता कहते हैं कि जिस तरह से आज बाजार में चाइनीज सामान बिक रहा है, ऐसे में गौ संरक्षण का संदेश देते हुए दीपक त्योहार की रौनक में चार चांद लगा देंगे. अगर गौशाला से जुड़ी महिलाएं इस तरह के काम से स्वावलंबी बनकर रोजगार हासिल कर रही हैं, तो इससे बेहतर क्या होगा. ऐसे में देसी गाय के गोबर और अन्य प्राकृतिक सामान से बने दीपक अयोध्या पहुंचकर इस दिवाली को गोमय बना देंगे.
सात जड़ी बूटी से बनेंगे दीपक : इन दीपों की खासियत यह है कि इन्हें देसी गाय के गोबर के साथ ही विशेष प्रकार की जड़ी बूटियां से तैयार किया जा रहा है. इन जड़ी बूटियों में रीठा, काली हल्दी, सतावर, जटामांसी, अश्वगंधा, सदाबहार और अतिबला के पाउडर को इस्तेमाल किया जा रहा है. दीपक तैयार कर रही महिला पिंकी ने बताया कि इन्हें मजबूती देने के लिए इनके ऊपर सरसों के तेल में काली मिट्टी का लेप किया जाएगा. इसमें गोंद भी मिलाया गया है, ताकी मजबूती के साथ इन दीपक से त्योहार मनाया जा सके.
जलते दीप देंगे हवन की अनुभूति : इन दीपों को प्राकृतिक रंगों से सजाया जा रहा है, जिसके लिए गौशाला की पौधशाला के सूखे हुए फूलों की पत्तियों के रंगों का इस्तेमाल किया जा रहा है. वहीं, एक अन्य महिला शिमला ने बताया कि वह बीते एक हफ्ते में चार हजार के करीब दीपक तैयार कर चुकी हैं. वे इस काम को दीपावली तक जारी रखेंगी. जयपुर में तैयार होने वाले यह दीपक विशेष प्रकार के होंगे, जो पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के साथ ही हवन की अनुभूति देंगे. विशेष मिश्रण से तैयार दीपक को जलाने पर ये प्रकाश के साथ हवन जैसी सुगंधित खुशबू का अहसास भी करवाएंगे.
गौरतलब है कि सरयू के घाट पर होने वाले दीपोत्सव कार्यक्रम के लिए अयोध्या में 26 लाख दीये जलाए जाएंगे. इनमें से 5 लाख दीपक जयपुर की 10 अलग-अलग गौशालाओं से तैयार होकर अयोध्या भेजे जाएंगे. गो संवर्धन कार्यक्रम के तहत पिंजरापोल गौशाला में न सिर्फ दीपक और गाय के उत्पादों का प्रचार किया जाता है, बल्कि यहां से तैयार गाय के गोबर से बनी हुई खाद को अरब देशों में भी निर्यात किया जाता है. खजूर की खेती में अरब देशों के व्यापारी और किसान गाय के गोबर से बनी खाद का इस्तेमाल करते हैं.




















