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आखिर क्यों करें हम वोटर कार्ड को आधार से लिंक : डॉ राधाकिशन सोनी

ड़ॉ राधा किशन सोनी

भारत निर्वाचन आयोग ने मतदाताओं को बेहतर सुविधाएँ प्रदान करने के उद्देश्य से निर्वाचन कानून (संशोधन) नियम 2021 के माध्यम से लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम एवं मतदाता रजिस्ट्रीकरण नियम में संशोधन कर पंजीकरण के लिए वर्ष में चार अर्हता तिथियाँ क्रमशः 1 जनवरी, 1 अप्रेल, 1 जुलाई एवं 1 अक्टूबर निर्धारित की हैं तथा सेवा नियोजित मतदाताओं के लिए सम्बन्धी के कॉलम में पत्नी के साथ-साथ पति शब्द का कॉलम भी जोड़ा गया है। प्ररूप 6 केवल पहली बार पंजीकरण के लिए तथा नाम स्थानान्तरण, प्रविष्टियों में सुधार, डुप्लीकेट वोटर कार्ड एवं दिव्यांग मतदाता सूचीकरण हेतु केवल फॉर्म 8 बनाया गया है। आपत्ति एवं नाम हटाने के लिए प्ररूप 7 पूर्व निर्धारित है। इसके अलावा मतदाता सूची को आधार से लिंक करने की अभिनव पहल की है।

आधार संख्या उपलब्ध करवाने को लेकर कुछ मतदाताओं के मन में शंकाएं हैं। ऐसे मतदाताओं का कहना है कि आधार में हमारी निजी जानकारी संकलित रहती है। आधार पेन कार्ड एवं बैंकों से जुड़ा है। ऐसे में वोटर कार्ड को आधार से लिंक करवाने पर हमारी निजी जानकारी लोगों तक पहुंच सकती है। अतः हम वोटर कार्ड को आधार से लिंक नहीं करवाएंगे। दरअसल ऐसे लोग वोटर कार्ड को आधार से लिंक कराने के फायदों से अनभिज्ञ हैं। वे आधार संख्या को सावर्जनिक करने से होने वाले काल्पनिक नुकसान से भयभीत हैं, किन्तु वे इस बात पर जरा भी चिंतन नहीं करते कि वोटर कार्ड को आधार से लिंक करने पर उनकी आधार संख्या कहीं भी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित नहीं होगी। मतदाता सूची में अथवा किसी भी सोशल प्लेटफार्म पर आधार संख्या दृष्टव्य नहीं होगी। बहुत जरूरी होने पर ही आधार संख्या के अन्तिम कुछ डिजिट (चार डिजिट) दिखाए जा सकेंगे जो कि कॉमन होंगे। ये अन्तिम चार डिजिट करोड़ों व्यक्तियों के समान होते हैं तथा किसके हैं, का अंदाजा लगाना भी कतई आसान नहीं है। दूसरे, व्यक्तिगत डेटाबेस के लिए आधार संख्या एकत्रीकरण में आधार वैधता अधिनियम 2016 के प्रावधानों की पूर्णतः पालना की जाएगी। उनके संरक्षण एवं सुरक्षा को लेकर आयोग द्वारा विशेष एवं कड़े नियम बनाए गए हैं। जो व्यक्ति वोटर कार्ड को आधार से लिंक करने से सशंकित हैं, शायद उन्होंने कभी यह नहीं सोचा होगा कि किसी नेटवर्क की सिम लेने, किसी होटल में रुकने के समय, स्टाम्प खरीदते समय और न जानें कितने ऐसे अवसर और कार्य होते हैं जहाँ हम आंख मूंद कर बिना सोचे समझें आधार की फ़ोटो दे देते हैं। उस समय निजी जानकारी सार्वजनिक होने का डर उन्हें नहीं सताता है। आयोग ने जो प्रावधान किए हैं, में राष्ट्रीय मतदाता सेवा पोर्टल, वोटर पोर्टल, वोटर हेल्प लाइन ऐप्प आदि के माध्यम से आधार संख्या की ऑनलाइन फीडिंग का प्रावधान किया है। ऐसी स्थित में न तो आधार कार्ड दिखाने की आवश्यकता है और न ही फ़ोटो प्रति उपलब्ध करवाने की। हाँ, जो मतदाता स्वयं आधार संख्या फीडिंग नहीं कर सकते उनके लिए आधार की प्रति बीएलओ को उपलब्ध करवानी होगी।
आइए! अब वोटर कार्ड को आधार से लिंक करवाने से होने वाले फायदों के बारे में जान लेते हैं।
1. प्रायः देखा जाता है कि मतदाता सूची एवं मतदाता के अन्य दस्तावेजों में व्यक्ति का नाम, सम्बन्धी का नाम, सम्बन्ध का प्रकार, आयु, जन्म तिथि आदि में अन्तर पाया जाता है। अतः मतदाता की इन सूचनात्मक प्रविष्टियों में समानता रखने के लिए प्रमाणीकरण एवं शुद्धिकरण के उद्देश्य से ही आधार को लिंक किया जा रहा है। आधार सूचनाओं में अंकित इन जानकारियों
के अलावा अन्य किसी का उपयोग आधार लिंकिंग के समय नहीं किया जाएगा।
2. कुछ मतदाताओं के नाम एक से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों या एक निर्वाचन क्षेत्र के एक से अधिक भागों की मतदाता सूचियों में अंकित होते हैं। आधार से लिंक होने के पश्चात मतदाता का नाम उसकी इच्छा से उसके निवास स्थान के निर्वाचन क्षेत्र भाग में ही रहेगा। अन्य मतदाता सूचियों से हटा दिया जाएगा। इस प्रकार चुनावी आंकड़ा प्रबंधन एवं डुप्लीकेशन की समस्या दूर हो सकेगी।
3. मतदान के दौरान कहीं-कहीं फर्जीवाड़ा एवं गड़बड़ियाँ होने के प्रकरण बनते हैं। आधार प्रमाणीकरण से इस प्रकार की घटनाओं पर भी रोक लगेगी।
इस प्रकार आयोग के अनुसार आधार डेटाबेस का उपयोग सिर्फ त्रुटिरहित निर्वाचन तैयारियों के लिए ही किया जाएगा।
अतः हर मतदाता को स्वयं पहल कर अपने वोटर कार्ड को आधार से लिंक कर स्वच्छ-स्वस्थ एवं त्रुटिरहित मतदाता सूची तैयार करने, निर्विघ्न एवं शांतिपूर्ण मतदान-प्रक्रिया सम्पन्न करवाने, अन्य निर्वाचन प्रबन्धन आदि में आयोग की इस योजना को साकार करना चाहिए। हम सबका नैतिक कर्तव्य है कि भारत का लोकतंत्र मजबूत बनें, हर मतदाता अपने मताधिकार के उपयोग के माध्यम से अपनी बात को लोकतांत्रिक व्यवस्था में रख सके। ध्यान रहे, एक जागरूक मतदाता ही देश का भाग्य विधाता हो सकता है। इसलिए जागरूक होइए, और आज ही अपने वोटर को आधार से लिंक कीजिए।

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