राजस्थान में स्कूल लेक्चरर एवं कोच भर्ती परीक्षा-2024 का आगाज सोमवार से हो गया, लेकिन पहले ही दिन परीक्षा केंद्रों पर ऐसे दृश्य देखने को मिले, जिन्होंने हजारों अभ्यर्थियों की धड़कनें तेज कर दीं। किसी को सिर्फ एक मिनट की देरी महंगी पड़ी तो कोई दौड़ते हुए भी गेट पार नहीं कर सका। एक ओर परीक्षा केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा और सख्त नियम लागू किए गए, तो दूसरी ओर कुछ अभ्यर्थियों के लिए ये परीक्षा किसी सपने के टूटने जैसी बन गई।
सिर्फ एक मिनट की देरी और गेट बंद!
सीकर जिले के एसके स्कूल एग्जाम सेंटर पर एक ऐसा नजारा देखने को मिला जिसने सभी को चौंका दिया। परीक्षा के समय से ठीक एक मिनट बाद यानी 9:01 बजे पहुंचे कई अभ्यर्थियों को गेट पर ही रोक दिया गया। जब वे हाथ जोड़कर विनती करते रहे, तब भी नियमों की दीवारें टस से मस नहीं हुईं। खास बात ये रही कि इन अभ्यर्थियों में एक गर्भवती महिला भी शामिल थी, जिसे भी बिना किसी छूट के वापस लौटना पड़ा। उसके चेहरे पर मायूसी साफ झलक रही थी, लेकिन गेट के पहरेदारों ने निर्देशों का हवाला देकर किसी को भी अंदर नहीं जाने दिया।
कोटा में भी मायूस लौटी महिला अभ्यर्थी
कोटा में भी कुछ ऐसा ही हुआ। एक महिला अभ्यर्थी जब केंद्र पर पहुंची तो गेट बंद हो चुका था। गार्ड ने प्रवेश से मना कर दिया। परीक्षा देने आई महिला की आंखों में आंसू थे, लेकिन सख्त नियमों के चलते उसे परीक्षा से वंचित होना पड़ा। कुछ अभ्यर्थियों के परिजन बाहर नाराजगी जाहिर करते दिखे, तो कुछ छात्रों के बीच गुस्से में बहस भी हुई।
15 जिलों में 909 केंद्र, 6 लाख से ज्यादा अभ्यर्थी
राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित इस परीक्षा में कुल 2,202 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। इसके लिए राज्य भर से करीब 6 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है। इतनी बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को संभालने के लिए परीक्षा को 4 चरणों में बांटा गया है और ये परीक्षा 4 जुलाई तक जारी रहेगी। पहले दिन दो विषयों – जनरल अवेयरनेस एंड जनरल स्टडीज और हिंदी सामान्य की परीक्षाएं ली जा रही हैं।
सीकर में तगड़ा बंदोबस्त, लेकिन मानवता नहीं दिखी
सीकर जिले में इस परीक्षा के लिए 49 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। आज की पहली पारी में 14,412 और दूसरी पारी में 5,063 अभ्यर्थियों के आने की व्यवस्था थी। हर केंद्र पर सुरक्षा के सख्त इंतजाम किए गए, लेकिन कई जगह सख्ती ने इंसानियत को भी पीछे छोड़ दिया। दौड़ते हुए केंद्र पर पहुंचे कई अभ्यर्थी समय सीमा के कारण निराश लौटते नजर आए।
परीक्षा में पहनावे पर भी पाबंदी, जेवरात तक नहीं चले
परीक्षा में सिर्फ समय ही नहीं, पहनावे और सामान पर भी सख्ती बरती गई है। आयोग ने दिशा-निर्देश जारी कर साफ किया कि किसी भी तरह के गहने, घड़ी, चश्मा, बेल्ट, हेयर पिन, हैंडबैग, स्कार्फ, मफलर, ताबीज, टोपी आदि पूरी तरह से प्रतिबंधित हैं। पुरुषों को आधी आस्तीन की शर्ट, टी-शर्ट या कुर्ता और पायजामा व हवाई चप्पल पहनने की अनुमति दी गई है। वहीं महिलाओं को सलवार सूट, साड़ी और आधी आस्तीन के कुर्ते/ब्लाउज के साथ साधारण रबर बैंड का ही इस्तेमाल करना है।
सिख अभ्यर्थियों को मिली छूट
धार्मिक भावनाओं का ध्यान रखते हुए सिख धर्म के अभ्यर्थियों को परीक्षा में कड़ा, कृपाण और पगड़ी पहनने की छूट दी गई है। यह निर्णय आयोग की ओर से संवेदनशीलता के साथ लिया गया है।
अब अगले चरण की तैयारी, लेकिन सवाल बरकरार
परीक्षा के पहले ही दिन जिस तरह की घटनाएं सामने आईं, उसने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या नियमों की सख्ती के साथ थोड़ा मानवीय दृष्टिकोण नहीं अपनाया जा सकता? क्या गर्भवती महिला, या एक मिनट की देरी से आए अभ्यर्थी को मौका नहीं दिया जाना चाहिए था?
परीक्षा तो जारी रहेगी, लेकिन कई अभ्यर्थियों के लिए यह दिन हमेशा याद रहेगा – किसी के लिए सख्ती की मिसाल बना तो किसी के लिए अधूरे ख्वाबों की कहानी।




















