जोधपुर : केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी पार्टियों पर निशाना साधते हुए कहा कि जब इनके पास मुद्दे समाप्त हो जाते हैं तब इनकी ओर से झूठा नैरेटिव गढ़ने का प्रयास किया जाता है, ताकि खुद की प्रासंगिकता को बनाया रखा जा सके. शनिवार सुबह अपने गृह नगर पहुंचे शेखावत ने मीडिया से बातचीत में कहा कि मालेगांव ही नहीं, चाहे संविधान बदलने की बात हो, चुनाव और आरक्षण समाप्त करने की बात हो, इनको लेकर भी विपक्ष लगातार झूठा नैरेटिव गढ़ते रहा है.
उन्होंने कहा कि अब स्पेशल इंटेंसिव रिव्यू (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर भी इसी तरह के झूठे प्रचार किए जा रहे हैं, लेकिन देश की जनता कांग्रेस और विपक्ष का चरित्र जानती है. सत्य को छिपाया जा सकता है, लेकिन उसको मिटाया नहीं जा सकता है. मालेगांव मामले पर कोर्ट के फैसले के बाद एक फिर इनके झूठे नैरेटिव का चेहरा बेनकाब हुआ है और सत्य विजयी हुआ है. शेखावत इसके बाद काजरी में पीएम किसान निधि वितरण कार्यक्रम में शामिल हुए.
भारत की अर्थव्यवस्था सुरक्षित : अमेरिका की ओर से टैरिफ बढ़ाए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था अपेक्षाकृत सुरक्षित है, क्योंकि भारत का प्रमुख निर्यात सेवा क्षेत्र से संबंधित है. भारत गुणवत्ता सुधार और लागत घटाकर वैश्विक प्रतिस्पर्धा में टिक सकता है. उन्होंने यह भी विश्वास जताया कि भारत आने वाले दो वर्षों में विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा. साथ ही, उन्होंने किसानों के लिए फूड प्रोसेसिंग सेक्टर में नए अवसरों के खुलने की बात भी कही.
नीलामी रुकवा कर लाए अस्थियां : भगवान बुद्ध की अस्थियों के भारत वापस आने के सवाल पर शेखावत ने कहा कि भगवान बुद्ध के महापरिनिर्वाण के बाद उनकी अस्थियां आठ हिस्सों में बांटी गई थीं. इनमें एक हिस्सा कपिलवस्तु के पीपरवाह में उनके शक्य वंशजों की ओर से एक पत्थर के बक्से में रखा गया था. यह बक्सा वर्ष 1898 में अंग्रेजों की ओर से की गई खुदाई में मिला था, लेकिन तब अंग्रेज इस धरोहर को अपने साथ इंग्लैंड ले गए और खोजकर्ता विलियम प्रेपे को सौंप दिया गया. शेखावत ने बताया कि यह संपदा बाद में अमेरिका चली गई, जहां अप्रैल में इसके नीलामी की खबर सामने आई. भारत सरकार ने तत्काल हस्तक्षेप कर नीलामी को रुकवाया और यह स्पष्ट किया कि भारत इसे अधिग्रहित करना चाहता है. इसके बाद, ऐतिहासिक कदम उठाते हुए यह अमूल्य धरोहर भारत वापस लाई गई.




















