जयपुर: 2008 के मालेगांव बम ब्लास्ट मामले में एनआईए की विशेष अदालत ने गुरुवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए सभी सात आरोपियों को बरी कर दिया. कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर पाया कि विस्फोट में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल आरोपियों की ही थी. कोर्ट के इस फैसले के बाद देशभर में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है और पक्ष-विपक्ष के नेताओं की ओर से लगातार प्रतिक्रियाएं आ रही हैं.
भजनलाल शर्मा का बयान: राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने मालेगांव केस में आए कोर्ट के फैसले पर सोशल मीडिया के जरिए अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने लिखा, “न्याय की यह जीत सभी सनातनियों के लिए गर्व का विषय है.” भजनलाल शर्मा ने कांग्रेस पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी ने तुष्टिकरण की राजनीति के तहत ‘हिंदू टेरर’ जैसा आपत्तिजनक शब्द गढ़ा था, जिससे न केवल सनातन धर्म की छवि को धूमिल किया गया, बल्कि निर्दोष साधु-संतों और धर्मगुरुओं को भी निशाना बनाया गया.
उन्होंने आगे कहा कि संसद में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी स्पष्ट कहा था कि ‘हिंदू कभी आतंकी नहीं हो सकते’ क्योंकि हिंदू धर्म की मूल भावना ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ में निहित है, न कि हिंसा में. मालेगांव विस्फोट केस में सभी आरोपियों की रिहाई उसी सत्य की पुष्टि है. यह निर्णय भारत की न्याय व्यवस्था की निष्पक्षता और ‘सत्यमेव जयते’ के सिद्धांत को स्थापित करता है.
कोर्ट ने क्या कहा: एनआईए की विशेष अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष यह तो साबित कर पाया कि 2008 में मालेगांव में विस्फोट हुआ था, लेकिन वह यह साबित नहीं कर पाया कि मोटरसाइकिल में बम रखा गया था और वह मोटरसाइकिल किसकी थी. अदालत ने यह भी कहा कि घायलों की उम्र को लेकर दस्तावेजों में हेराफेरी की गई. कुछ मेडिकल सर्टिफिकेट में गड़बड़ी पाई गई और घायलों की उम्र 101 साल नहीं बल्कि 95 साल निकली.
गौरतलब है कि इस केस को 2011 में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंपा गया था. एनआईए ने जांच के बाद सात आरोपियों के खिलाफ औपचारिक आरोप तय किए थे और मामला ट्रायल में चला. अब कोर्ट ने सभी सातों को आरोपों से मुक्त कर दिया है.




















