जयपुर: राजस्थान विश्वविद्यालय की ई-लाइब्रेरी, जिसे पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने शानदार उद्घाटन के साथ लॉन्च किया था, आज भी कागजी घोषणाओं तक ही सीमित है. इधर, छात्रों की जरूरत को समझते हुए ग्रेटर जयपुर नगर निगम ने पहल की है और विश्वविद्यालय के नजदीक ही एक आधुनिक स्मार्ट डिजिटल लाइब्रेरी तैयार की है, जो जल्द ही शुरू होगी. यह लाइब्रेरी आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए विशेष रूप से उपयोगी होगी, जो महंगे कोचिंग और डिजिटल संसाधनों तक नहीं पहुंच पाते.
अब तक डिजिटल नहीं हुई है आरयू की लाइब्रेरी: राजस्थान विश्वविद्यालय में 12 करोड़ की लागत से स्मार्ट सेंट्रल लाइब्रेरी तैयार की गई थी, लेकिन ये लाइब्रेरी उद्घाटन के करीब तीन साल बाद तक भी स्मार्ट नहीं बन पाई है. यहां बैठने के एक कमरे के अलावा कुछ भी सुविधा नहीं है. न डिजिटल सिस्टम बना है, न ही किताबें हैं. तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस लाइब्रेरी का उद्घाटन करते वक्त दावा किया था कि यहां हजार छात्रों को न सिर्फ पढ़ने के लिए उपयुक्त वातावरण मिलेगा, बल्कि इस पूरी लाइब्रेरी का डिजीटलीकरण किया जाएगा. यहां आरएफआईडी तकनीक और ओपेक सेवाओं का इस्तेमाल किया जाएगा. ताकि एंट्री से लेकर एग्जिट तक छात्र निगरानी में रहे. पांच हजार से ज्यादा किताबें रखी जाएंगी, लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं.
छात्रों और अभ्यर्थियों के लिए नि:शुल्क सुविधा: हालांकि अब ग्रेटर नगर निगम विश्वविद्यालय के ठीक सामने ई-लाइब्रेरी शुरू करने जा रहा है. यहां प्रतियोगिता परीक्षाओं और विभिन्न बोर्ड की ई बुक्स उपलब्ध कराई जाएंगी. छात्र रिकॉर्डेड क्लासेस और विषय विशेषज्ञों के लाइव सत्र देख और सुन सकेंगे. ग्रेटर नगर निगम की महापौर सौम्या गुर्जर ने बताया कि ई-लाइब्रेरी में हाई-स्पीड वाई-फाई, कंप्यूटर जैसी सुविधाएं होगी. यह ई-लाइब्रेरी पूरी तरह फ्री रहेगी. भवन में कंप्यूटर लैब, एसी, फर्नीचर, बैठने की सुविधा से लेकर तकनीकी सपोर्ट तक हर पहलू पर विस्तार से काम किया गया है. यह विश्वविद्यालय के नजदीक ही होगी, जिससे विश्वविद्यालय आने वाले छात्रों के लिए यह उपयोगी रहेगी.
ये होंगी सुविधाएं :
- विभिन्न परीक्षाओं की ऑनलाइन टेस्ट सीरीज
- रिजल्ट के साथ एनालिसिस रिपोर्ट
- हाई-स्पीड इंटरनेट और कम्प्यूटर / टैबलेट एक्सेस
- लाइब्रेरी में वाई-फाई सुविधा
- छात्रों के लिए कम्प्यूटर, प्रोजेक्टर, टीवी और बुक्स की उपलब्धता
- छात्रों का पंजीकरण कर डिजिटल आईडी
- फर्नीचर, बिजली, एयर कंडीशनिंग, बैठने की सुविधा
- हाई स्पीड इंटरनेट कनेक्शन
- पाठ्य सामग्री के लिए ओपन सोर्स और लाइसेंस प्राप्त प्लेटफार्म से कंटेंट
CSR और सरकारी फंडिंग से मिला सपोर्ट: इस प्रोजेक्ट में कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के तहत निजी संस्थानों की सहभागिता जोड़ी गई है. साथ ही, केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं जैसे PM E-Vidya, Digital India, Skill India और स्थानीय शिक्षा निधि से संसाधन जुटाए गए हैं.निगम समिति चेयरमैन और स्थानीय पार्षद जितेंद्र श्रीमाली ने बताया कि जिस जगह लाइब्रेरी बनाई गई है, वहां लोगों ने अतिक्रमण कर रखा था. इसे मुक्त करवाकर इस जमीन पर लाइब्रेरी बनवाई गई है. उन्होंने तंज कसा कि कांग्रेस ने अपने शासनकाल में बहुत से फीते काटने का काम किया था, लेकिन उनमें से बहुत सी योजनाएं मूर्त रूप नहीं ले पाई थी. राजस्थान विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी भी उन्हीं में से एक है. बहरहाल, नगर निगम की ये पहल आने वाले समय में अन्य शहरी निकायों के लिए भी एक प्रेरणास्रोत बन सकती है.




















