राजस्थान में इस साल मानसून पूरी तरह मेहरबान नजर आ रहा है। सामान्य से करीब 128 फीसदी अधिक बारिश अब तक दर्ज की जा चुकी है। मंगलवार को प्रदेश के कई जिलों में जोरदार बारिश हुई और बुधवार के लिए भी मौसम विभाग ने 25 जिलों में अलर्ट जारी कर दिया है। बारिश का यह सिलसिला आगामी पांच दिनों तक जारी रह सकता है। खासकर 11 और 12 जुलाई को कोटा, भरतपुर और उदयपुर संभाग में कहीं-कहीं भारी बारिश की चेतावनी दी गई है।
पिछले 24 घंटे के भीतर सबसे ज्यादा बारिश श्रीगंगानगर में दर्ज हुई, जहां 69 मिमी पानी बरसा। दोपहर बाद यहां तेज आंधी और बारिश ने मौसम को एकदम बदल डाला। हनुमानगढ़ के संगरिया इलाके में 22 मिमी और दौसा के बांदीकुई में 39 मिमी बारिश हुई। जयपुर में भी दोपहर तक उमस भरी गर्मी के बाद शाम को मौसम पलटा और तेज बरसात हुई।
उमस और नमी ने बढ़ाई परेशानी
हालांकि बारिश ने गर्मी से राहत दी, लेकिन कुछ शहरों में उमस की स्थिति बनी रही। राज्य के कई हिस्सों में ह्यूमिडिटी लेवल 75 प्रतिशत से अधिक दर्ज किया गया। अजमेर, भीलवाड़ा, अलवर, पिलानी, चित्तौड़गढ़, सीकर, उदयपुर और जोधपुर जैसे जिलों में वातावरण में अधिक नमी बनी रही, जिससे लोगों को चिपचिपी गर्मी का सामना करना पड़ा।
बीसलपुर बांध का जलस्तर बढ़ा, नदी में तेजी
टोंक जिले में भी रिमझिम बारिश का दौर जारी है, जिससे बीसलपुर बांध के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। मंगलवार सुबह 6 बजे तक 4 सेंटीमीटर पानी बांध में आया। इसके साथ ही जलस्तर 313.86 आरएल मीटर पर पहुंच गया। अब तक बांध में 27.322 टीएमसी पानी भर चुका है, जो इसकी कुल क्षमता 38.703 टीएमसी का करीब 70.59 प्रतिशत है। साथ ही, त्रिवेणी नदी भी 2.80 मीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से बह रही है।
इन जिलों में रहे सतर्क
मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में बीकानेर, चूरू, झुंझुनूं, सीकर, नागौर, पाली, जालोर, बाड़मेर, कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़, भरतपुर, धौलपुर, अलवर, जयपुर, दौसा, सवाई माधोपुर, करौली, टोंक, उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, चित्तौड़गढ़ और प्रतापगढ़ जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।
कृषि और जल संकट से राहत की उम्मीद
मानसून की इस मेहरबानी से किसानों को बड़ी राहत मिली है। खेतों में पानी भरने से खरीफ की फसल के लिए अनुकूल माहौल बना है। साथ ही, बीसलपुर और अन्य बांधों में जलस्तर बढ़ने से आने वाले महीनों में जल संकट से भी राहत मिलने की उम्मीद है।
राजस्थान में इस तरह की मानसूनी सक्रियता ने उम्मीदें जगा दी हैं कि इस बार जल संसाधनों की स्थिति बेहतर रहेगी और गर्मियों में कम पानी की किल्लत झेलनी पड़ेगी।




















