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जम्मू-कश्मीर में राजस्थान का जवान शहीद:बेटी से फोन पर कहा था-तुझे आर्मी का अफसर बनना है; पत्नी और पिता शहादत से अनजान

जम्मू-कश्मीर के गुलमर्ग में रविवार (8 जून) रात डेढ़ बजे सिर में गोली लगने से चूरू के आर्मी के जवान भंवरलाल (32) शहीद हो गए। शहादत की जानकारी अब तक उनके परिवार को नहीं दी गई है।

शहीद के घर में पत्नी तारामणी (30), पिता उमाराम (70) और 5 साल की बेटी रितिका हैं। छोटे भाई मुकेश (27) के अलावा सिर्फ इतना कहा गया है कि ऑपरेशन के दौरान भंवरलाल घायल हुए हैं और इलाज चल रहा है। सूचना के बाद से पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार वाले उसे लगातार दिलासा दे रहे हैं।

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शहीद का पार्थिव शरीर सोमवार शाम श्रीनगर में रखा गया था। मंगलवार सुबह 10:30 बजे दिल्ली लाया गया। जहां से सड़क मार्ग से दोपहर 2 बजे सरदारशहर के लिए रवाना किया गया। रास्ते में राजगढ़, तारानगर, भालेरी और राजस्थान बॉर्डर पर श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी। रात करीब 10 बजे पार्थिव देह के साथ सेना के जवान सरदारशहर पहुंचेंगे।

बुधवार सुबह 8 बजे तिरंगा स्टेडियम, सरदारशहर से ‘तिरंगा यात्रा’ निकाली जाएगी, जो पार्थिव देह को अंतिम सफर पर लेकर लूणासर गांव पहुंचेगी। वहां राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा।

पिता उमाराम ने बताया कि रेजिमेंट से सूचना मिली थी कि उनके बेटे के गोली लगी है। उस समय सेना ने गांव के सरपंच भंवरलाल पांडर से संपर्क कर उनका नंबर लिया था।

धर्मपाल बोला- साथ में पढ़ाई की थी

गांव के रहने वाले धर्मपाल ने बताया कि वह और भंवरलाल एक साथ पढ़े हैं। धर्मपाल ने 2013 में आर्मी जॉइन की थी और इन दिनों हरियाणा के हिसार में तैनात हैं। उन्होंने बताया कि दो दिन पहले रविवार को मेरी रेजिमेंट से बात हुई थी। मेरा नंबर भी ‘फौजी’ के नाम से सेव है, उसी नंबर पर फोन आया कि रात डेढ़ बजे के करीब फायरिंग के दौरान भंवरलाल को गोली लगी है। बाद में साथियों से बात की तो पता चला कि भंवरलाल शहीद हो गया।

धर्मपाल ने बताया- भंवरलाल की मां सुखी देवी की मृत्यु करीब 8 साल पहले बीमारी के कारण हो गई थी। साल 2014 में भंवरलाल की शादी सरदारशहर के मालसर गांव की तारामणी (30), पुत्री बीरबल से हुई थी। उनकी एक 5 वर्षीय बेटी रितिका है।

जवान भंवरलाल तीन महीने पहले घर पर छुटि्टयां बीताकर वापस घर लौटे थे। घटना से दो दिन पहले (6 जून) बेटी रितिका से फोन पर बात हुई थी। उन्होंने कहा था कि बेटी, खूब पढ़ाई करना… तुझे आर्मी में बड़ा अफसर बनना है..।

2015 में सेना में भर्ती हुए थे

गांव के सरपंच भंवरलाल पांडर ने बताया कि भंवरलाल सारण 2015 में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। वे हमेशा अनुशासनप्रिय, हंसमुख और सहयोगी स्वभाव के थे। सेना में रहते हुए भी वे गांव और परिवार से जुड़े रहे। वर्तमान में वे गुलमर्ग सेक्टर में तैनात थे।

गांव लूणासर के श्मशान घाट पर जेसीबी और ट्रैक्टर की मदद से अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। लेकिन शहीद की पत्नी, पिता और परिवार इस सच्चाई से अभी अनजान हैं।

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