जयपुर: छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग को लेकर एनएसयूआई 5 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेगी. रविवार को एनएसयूआई के प्रदेशाध्यक्ष विनोद जाखड़ ने प्रेस कांफ्रेंस कर इसका ऐलान किया. जाखड़ ने कहा कि 5 अगस्त को सुबह 10 बजे प्रदेश भर से छात्र और एनएसयूआई से जुड़े कार्यकर्ता शहीद स्मारक पर इकट्ठा होंगे और यहां से रैली के रूप में मुख्यमंत्री आवास की तरफ कूच करेंगे. उन्होंने कहा कि एनएसयूआई के प्रदर्शन में कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री सचिन पायलट, प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री हरीश चौधरी भी शामिल होंगे.
उन्होंने बताया कि छात्र राजनीति से निकले विधायकों, सांसदों और दिग्गज नेताओं को भी प्रदर्शन में आमंत्रित किया गया है. उन्होंने कहा कि भाजपा ने वादा किया था कि हम सत्ता में आए तो छात्रसंघ चुनाव करेंगे, लेकिन सत्ता में आने के बाद भाजपा सरकार अपने वादे से मुकर गई है. जब से छात्रसंघ चुनाव बंद हुए हैं, तब से कॉलेज कैम्पस की हालत खस्ता हो गई है. प्रशासन तानाशाही करता है, केस लगाने की धमकी देता है. हम प्रशासन के पास जाते हैं, तो प्रशासन छात्रों की कोई सुनवाई नहीं करता है.
सभी वर्गों को कार्यकारिणी में उचित प्रतिनिधित्व दिया: एससी-एसटी, ओबीसी और माइनॉरिटी को कार्यकारिणी में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं देने के सवाल पर उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है. हमने राहुल गांधी की मंशा के अनुरूप एससी-एसटी, ओबीसी और माइनॉरिटी वर्ग को उचित प्रतिनिधित्व दिया है. उन्होंने कहा कि जिलाध्यक्ष महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है इसलिए हमने बहुत सोच समझकर ही जिला अध्यक्ष बनाए हैं. अल्पसंख्यक वर्ग से भी दो जिलाध्यक्ष बनाए हैं. हमारा काम राजनीति करना नहीं है, बल्कि कॉलेज कैंपस के अंदर काम करना है.
पूर्व सरकार ने 1 साल के लिए लगाई थी चुनाव पर रोक: विनोद जाखड़ ने कहा कि जर्जर स्कूलों के मामले में हमारा प्रतिनिधिमंडल भी मनोहर थाना गया था और पीड़ित परिवार से मुलाकात कर उनकी मदद की थी. हमारे प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर को ज्ञापन देकर विश्वविद्यालय-कॉलेज सहित सभी भी शैक्षणिक संस्थानों में पुनर्निर्माण की मांग की है. जाखड़ ने पूर्ववर्ती सरकार की ओर से छात्रसंघ चुनाव पर रोक लगाने के सवाल पर कहा कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने छात्रसंघ चुनाव पर रोक केवल 1 साल के लिए लगाई थी. क्योंकि तब नई शिक्षा नीति लागू करनी थी. विश्वविद्यालय प्रशासन ने सरकार से उसे लागू करने के लिए कम से कम 1 साल का समय मांगा था. तब पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी कहा था कि अगर हमारी सरकार रिपीट होती है, तो हम जनवरी में ही छात्रसंघ चुनाव करवाने का प्रयास करते.




















