जयपुर: केंद्र सरकार की ओर से लाए गए वक्फ संशोधन कानून को लेकर मुस्लिम संगठनों की ओर से चलाए जा रहे राष्ट्रव्यापी अभियान का दूसरा चरण जल्द ही शुरू होने वाला है. दूसरे चरण के तहत देशभर में अलग-अलग धर्म के लोगों के साथ बैठक कर उन्हें सरकार की मंशा से अवगत करवाया जाएगा. गुरुवार को जयपुर आए वक्फ बचाओ संविधान बचाओ अभियान के राष्ट्रीय संयोजक और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉक्टर कासिम रसूल इलियास ने ये बातें कहीं.
उन्होंने बताया कि हमने पहले चरण में धरने प्रदर्शन और ज्ञापन दिए थे, अब दूसरे चरण में हम जैन, बौद्ध, सिख और ईसाई धर्म के लोगों के साथ बैठक करेंगे और उन्हें बताएंगे कि सरकार की मंशा क्या है. पहला हमला मुस्लिम कौम पर सरकार का हुआ है. इसके बाद सरकार जैन, बौद्ध, सिख और ईसाई धर्मों की संपत्तियों पर कब्जा का प्रयास करेगी. इलियास ने कहा कि वक्फ संशोधन कानून के खिलाफ मुसलमानों की ओर से 5 करोड़ से ज्यादा ईमेल भेजे गए थे. इसके बावजूद सरकार ने इसकी अनदेखी की है.
उन्होंने कहा कि वक्फ संशोधन कानून संविधान का भी उल्लंघन है और मुस्लिम समाज के अधिकारों का भी उल्लंघन है. हमें न्यायालय से भी उम्मीद है कि इस मामले में अंतिम फैसला हमारे पक्ष में आएगा, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को लेकर जो बहस हुई है वो काफी अच्छी हुई है. उम्मीद है कि फैसला हमारे पक्ष में ही आएगा. सरकार की कोशिश वक्फ संपत्तियों को अतिक्रमण से मुक्त करने की नहीं, बल्कि उन पर ही अतिक्रमण करने की है. अगर वे वक्फ संपत्तियों को अतिक्रमण से मुक्त करना चाहते हैं तो उनका स्वागत है, लेकिन जब सरकार की ही मंशा ठीक नहीं है तो फिर इसका विरोध तो किया जाएगा.
वक्फ बोर्ड और वक्फ काउंसिल सरकारों के अधीन : डॉ. कासिम रसूल इलियास ने कहा कि वक्फ बोर्ड राज्य सरकार और वक्फ काउंसिल केंद्र सरकार के अधीन होती हैं. अगर वक्फ की संपत्तियों पर कब्जे हो रहे थे तो उन कब्जों को हटाना वक्फ बोर्ड और वक्फ काउंसिल का जिम्मेदारी थी. 2013 में तत्कालीन मनमोहन सरकार ने एक ड्राफ्ट तैयार करवाया था, जिसके तहत एक कॉर्पोरेशन का गठन होना था. इसी के अधीन तमाम व संपत्ति आनी थी, लेकिन सत्ता बदलते ही मोदी सरकार ने सबसे पहले ड्राफ्ट को रिजेक्ट किया और अब वक्फ संशोधन कानून ले आए.




















