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एनएसयूआई जिलाध्यक्षों की घोषणा विवादों में, गहलोत को काले झंडे दिखाने वाले को मिली जयपुर की जिम्मेदारी

जयपुर: लंबे इंतजार के बाद घोषित हुई छात्र संगठन एनएसयूआई की जिलाध्यक्षों की सूची अब विवादों में घिर गई है. एक ओर जहां जिलाध्यक्षों की सूची में जातिगत और क्षेत्रीय संतुलन का अभाव है, वहीं दूसरी ओर पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर दूसरे दलों से आए लोगों को जिलाध्यक्ष बनाए जाने को लेकर भी विवाद बढ़ता जा रहा है.

इसके अलावा कई जिलों में ऐसे जिलाध्यक्ष बना दिए गए हैं जो उस जिले के न होकर दूसरे जिलों में निवास करते हैं. इसे लेकर भी स्थानीय स्तर पर संगठन से जुड़े कार्यकर्ताओं और नेताओं में नाराजगी उभर रही है. एनएसयूआई के जिलाध्यक्षों की जारी हुई सूची को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी संगठन से जुड़े नेताओं की नाराजगी खुलकर सामने आ रही है. कार्यकर्ता सोशल मीडिया पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं.

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जयपुर शहर अध्यक्ष को लेकर सबसे बड़ा विवाद: सबसे बड़ा मामला जयपुर शहर अध्यक्ष को लेकर है, जहां अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से एनएसयूआई में आए गुलशन मीणा को लेकर विवाद है. साल 2023 में विधि महाविद्यालय छात्र संघ कार्यालय का उद्घाटन करने राजस्थान विश्वविद्यालय आए तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को गुलशन मीणा ने काले झंडे दिखाए थे और इस मामले में उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था. अब ऐसे में पूर्व मुख्यमंत्री को काले झंडे दिखाने वाले नेता को एनएसयूआई का जिलाध्यक्ष बनाए जाने को लेकर कांग्रेस गलियारों में भी चर्चाएं हो रही हैं.

दूसरे जिलों के निवासियों को बनाया जिलाध्यक्ष: वहीं, कई जिले ऐसे भी हैं जहां पर दूसरे जिलों में निवास करने वाले कार्यकर्ताओं को जिलाध्यक्ष बनाया गया है. इसे लेकर स्थानीय स्तर पर जबरदस्त विरोध हो रहा है. इनमें डीडवाना कुचामन जिले में निवास करने वाले समीर खान को नागौर का जिला अध्यक्ष बनाया गया है. अजमेर शहर में निवास करने वाले अंकित घारू को अजमेर ग्रामीण का जिला अध्यक्ष बनाया गया है. वहीं कोटा ग्रामीण अध्यक्ष को लेकर भी विरोध बढ़ गया है.

बीकानेर में एक ही जाति के दो अध्यक्ष: सबसे दिलचस्प बात यह है कि बीकानेर शहर और बीकानेर ग्रामीण में एक ही जाति के नेताओं को जिलाध्यक्ष बनाए जाने से वहां भी स्थानीय स्तर पर विरोध हो रहा है. हरिराम गोदारा को बीकानेर शहर और कृष्ण गोदारा को बीकानेर ग्रामीण का जिला अध्यक्ष बनाया गया है.

राजस्थान एनएसयूआई की ओर से 50 जिलों में जिला अध्यक्षों की घोषणा की गई है, लेकिन दिलचस्प यह है कि पार्टी के परंपरागत वोट बैंक माने जाने वाले अल्पसंख्यक वर्ग को इसमें कम प्रतिनिधित्व दिया गया है. केवल दो ही जिलों में अल्पसंख्यक वर्ग के जिला अध्यक्ष बनाए गए हैं, जबकि पिछली बार आठ जिलों में अल्पसंख्यक वर्ग के जिला अध्यक्ष बनाए गए थे. इसे लेकर भी पार्टी के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कार्यकर्ता अपना विरोध जाहिर कर रहे हैं.

पार्टी के कार्यकर्ता आरिफ पठान ने लिखा कि “इतनी बड़ी लिस्ट में सिर्फ दो मुस्लिम नाम. अगर आप भेदभाव करोगे तो संगठन कैसे एकजुट होगा. जब आप लोग ही मुस्लिम समाज को दरकिनार कर रहे हैं.” इस मामले को लेकर अल्पसंख्यक वर्ग से जुड़े कुछ नेताओं ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को भी पत्र लिखा है.

चूरू कार्यकारी जिलाध्यक्ष को लेकर भी विरोध: वहीं चूरू के कार्यकारी अध्यक्ष नरपत रोलन को लेकर भी स्थानीय स्तर पर एनएसयूआई से जुड़े छात्र नेताओं ने विरोध करना शुरू कर दिया है. कार्यकर्ताओं का कहना है कि नरपत रोलन कभी भी किसी भी कॉलेज में अध्ययनरत नहीं रहे हैं. नियमों के अनुसार जिलाध्यक्ष पद के लिए व्यक्ति का किसी कॉलेज में अध्ययनरत होना जरूरी है.

पूर्व मुख्यमंत्री को काले झंडे दिखाने वाले गुलशन मीणा को जिलाध्यक्ष बनाए जाने को लेकर एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष विनोद जाखड़ का कहना है, “हमारे जयपुर शहर के जिलाध्यक्ष गुलशन मीणा पहले एबीवीपी में थे, फिर उन्होंने एनएसयूआई का दामन थामा है. उन्होंने अच्छा काम किया है. उस समय कांग्रेस सरकार थी, सरकार ने छात्रसंघ चुनाव बंद कर दिए थे. तब उन्होंने छात्र संघ चुनाव के लिए विरोध दर्ज कराया था. छात्र राजनीति में चाहे अपनी सरकार हो या विपक्ष की, अगर छात्रहितों के खिलाफ कोई फैसला लिया जाता है तो विरोध करना जायज है. उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को काले झंडे दिखाए, यह मेरे संज्ञान में नहीं है. अगर फिर भी ऐसा कुछ किया होगा तो गुलशन मीणा तब विपक्ष की भूमिका में थे.”

उन्होंने संगठन में हो रहे विरोध को लेकर कहा, “हमारी कार्यकारिणी अभी नई गठित हुई है. कार्यकारिणी में हमने उन काबिल लोगों को मौका दिया है जिन्होंने छात्र राजनीति में संघर्ष किया है, छात्र हितों के लिए आंदोलन किए हैं. रही बात कुछ खामियों की तो वो हम आंदोलन के बाद समीक्षा करेंगे. खामियां दूर करेंगे.”

5 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास का घेराव: वहीं छात्र संघ चुनाव सहित कई मुद्दों को लेकर एनएसयूआई 5 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेगा. पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट सहित कई नेता शामिल होंगे. विनोद जाखड़ ने कहा कि एनएसयूआई से निकलकर प्रदेश और देश की राजनीति में पहचान बनाने वाले प्रदेश के कई नेता इस आंदोलन में शामिल होंगे.

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