जयपुर: राजस्थान में उच्च शिक्षा विभाग की विद्या संबल योजना को लेकर बवाल मच गया है. योजना के तहत बीते कुछ वर्षों में काम कर चुके सहायक आचार्यों ने इसे शिक्षा जगत की ‘अग्निवीर योजना’ बताते हुए कड़ा विरोध शुरू कर दिया है. उनका कहना है कि इस योजना में शिक्षकों को न तो स्थायित्व मिला है और न ही अनुभव का कोई फायदा, उल्टा अब मानदेय घटाने की तैयारी की जा रही है, जिससे गुस्सा और बढ़ गया है.
डॉ. राम सिंह सामोता, जो स्वयं विद्या संबल योजना से जुड़े रहे हैं, उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस योजना के जरिए केवल बेरोजगारों के साथ धोखा कर रही है. उन्होंने कहा, “पिछले पांच सालों में हम जैसे हजारों सहायक आचार्य पढ़ा चुके हैं, लेकिन न समायोजन हुआ और न ही अनुभव प्रमाण पत्र दिए गए. अब मानदेय घटाकर ₹28,000 कर दिया गया है और परीक्षा लेकर पांच साल के लिए संविदा भर्ती की योजना बनाई जा रही है.”
डॉ. सामोता ने इस योजना को ‘शिक्षावीर योजना’ की संज्ञा दी और कहा कि यह बेरोजगारों के साथ कुठाराघात है. उन्होंने साफ कर दिया कि संविदा के आधार पर उच्च शिक्षा में किसी प्रकार की शिक्षावीर योजना स्वीकार नहीं की जाएगी. साथ ही यह चेतावनी दी कि जल्द ही युवा शक्ति आंदोलन की राह पर उतरेगी. उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा, जो उच्च शिक्षा विभाग का कार्यभार देख रहे हैं, उन्होंने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जैसे-जैसे रेगुलर कॉलेजों में भर्तियां हो रही हैं, वैसे-वैसे नियुक्तियां दी जा रही हैं. फिलहाल इंटरव्यू की प्रक्रिया चल रही है.
प्रेमचंद बैरवा ने स्पष्ट किया कि राजसेस सोसायटी के कॉलेजों में स्थाई शिक्षक नहीं लगाए जा सकते, क्योंकि वे रेगुलर नहीं हैं, जब ये कॉलेज रेगुलर होंगे, तभी स्थायी नियुक्तियां संभव होंगी, तब तक वहां विद्या संबल योजना के तहत शिक्षक लगाकर ही शिक्षण कार्य करवाया जाएगा. कॉलेज शिक्षा आयुक्त ओपी बैरवा ने भी योजना को लेकर विभाग की स्थिति स्पष्ट की. उन्होंने बताया कि वर्तमान में 2700 से अधिक गेस्ट फैकल्टी को विद्या संबल योजना के तहत नियुक्त किया गया है. वहीं, राजस्थान लोक सेवा आयोग के माध्यम से चयनित सहायक प्रोफेसर भी नियुक्त हो रहे हैं. अब तक करीब 800 प्रोफेसर्स की नियुक्ति हो चुकी है, जबकि 1200 की इंटरव्यू प्रक्रिया चल रही है.
आयुक्त ने यह भी बताया कि वर्तमान सत्र की कक्षाएं शुरू हो चुकी हैं, जिन कॉलेजों में जीरो वैकेंसी है, वहां पर विद्या संबल के तहत शिक्षकों की नियुक्ति की जा रही है. इनका चयन पूरे वर्ष के लिए होगा और इन्हें ₹800 प्रति कालांश के हिसाब से मानदेय मिलेगा. फिलहाल विभाग ने किसी भी तरह के बदलाव की संभावना से इनकार किया है और विद्या संबल योजना को केवल अंतरिम व्यवस्था बताया है, जब तक स्थायी भर्तियां पूरी नहीं हो जातीं.




















