राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने गुरुवार को 12वीं कक्षा के पाठ्यक्रम से दो किताबें हटाने की घोषणा की। उन्होंने दावा किया कि ये किताबें केवल गांधी परिवार के कुछ कांग्रेसी नेताओं का महिमामंडन करती हैं। इसके साथ ही सूबे के शिक्षा मंत्री ने स्कूली पाठ्यपुस्तकों में कथित तौर पर एकतरफा इतिहास पढ़ाए जाने का आरोप लगाया। मदन दिलावर के इस बयान पर कांग्रेस आगबबूला हो गई और उसने आरोप लगाया कि यह फैसला भाजपा और आरएसएस की संकीर्ण मानसिकता का उदाहरण है।
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने आरोप लगाया कि ‘आजादी के बाद स्वर्णिम भारत’ किताब के भाग 1 और 2 में कांग्रेस के कुछ नेताओं का महिमामंडन किया गया है। खासकर उनका जिन्होंने आपातकाल लगाया और संविधान की धज्जियां उड़ाते हुए लोकतंत्र की हत्या की। इन किताबों में महान नेताओं जैसे सरदार वल्लभभाई पटेल, लाल बहादुर शास्त्री, बीआर अंबेडकर और श्यामा प्रसाद मुखर्जी के ऐतिहासिक योगदान का जिक्र नहीं है। ये किताबें केवल गांधी परिवार का महिमामंडन करती हैं जिन्होंने देश में आपातकाल लगाया था।
इसके साथ ही शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने ऐलान किया कि हम छात्रों को ऐसी किताबें नहीं पढ़ाने देंगे। जिन लोगों ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण में बाधा डाली और अनुच्छेद 370 लागू किया उनके बारे में बच्चों को सम्मानपूर्वक कैसे पढ़ाया जा सकता है। इस किताब में तो पीएम मोदी, पूर्व उपराष्ट्रपति भैरों सिंह शेखावत और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे जैसे लोगों का जिक्र होना ज्यादा जरूरी है। ये किताबें पाठ्यक्रम का हिस्सा हैं जबकि परीक्षाओं में अंकों के लिए इनका कोई महत्व नहीं है। ऐसे में छात्रों पर बोझ क्यों डाला जाए?
शिक्षा मंत्री के बयान पर सूबे की सियासत गर्म हो गई है। कांग्रेस नेता गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि मंत्री दिलावर उस किताब को लेकर बेवजह विवाद खड़ा कर रहे हैं, जिसमें महान भारतीय नायकों के योगदान को दर्शाया गया है। यह एक वैचारिक हमला है और शिक्षा व्यवस्था पर आरएसएस की संकीर्ण सोच का नतीजा है। ये किताबें भाजपा सरकार, शिक्षा मंत्री और अन्य सरकारी अधिकारियों की अनुमति से छापी गई थीं। अब ताक कुल 4.90 लाख किताबें छप चुकी हैं और 80 प्रतिशत छात्रों को बांटी भी जा चुकी हैं।




















