वाराणसी मे तीन दिवसीय भारत नेपाल अंतराष्ट्रीय साहित्य संस्कृति महोत्सव शुरू। पाठक बिना लेखक व लेखन अधूरा है- सत्यदीप।
वाराणसी (तोलाराम मारू)
भारत- नेपाल अंतर-राष्ट्रीय साहित्य एवं संस्कृति मैत्री महोत्सव द्वारा आयोजित तीन दिवसीय आयोजन में उद्घाटन सत्र में
दिनांक 12 मार्च 2026 को राजस्थान बीकानेर श्रीडूंगरगढ़ से आमंत्रित वरिष्ठ साहित्यकार सत्यदीप का सद्य-प्रकाशित हिंदी कविता संग्रह “कविता महज आग नहीं होती” का लोकार्पण नेपाल के वरिष्ठ साहित्यकार डा.घनश्याम परिश्रमी नेपाल,डा. देवी पंथी नेपाल और राव शिवराजपाल सिंह जयपुर के द्वारा स्व. हनुमानप्रसाद जी पोद्दार ‘भाईजी’ स्मृति हाल दुर्गा कुंड वाराणसी में सम्पन्न हुआ। भारत नेपाल के इस संयुक्त रूप से संपन्न आयोजन में अपने विचार रखते हुए सत्यदीप ने वर्तमान समय की चुनौती पाठनीय वृति के समापन का दौर विकट है। पाठक के बिना लेखक व लेखन दोनों ही अधूरे है।

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डा.देवी पंथी नेपाल ने भारत नेपाल साहित्यिक संस्कृति के अंतर्संबधों की प्राचीनता अक्षुण्ण रखना ही आयोजन की उपलब्धि होगी । राव शिवराज सिंह जयपुर ने कहा कि समय बहुत विकट है, शब्द जब रहन रख दिये गये है। शब्दों की धार भोथरी होकर यशोगन में ढलने लगी है। इस विकट समय से शब्द का युद्ध और तेज करना होगा। आयोजन में संपूर्ण भारत के विभिन्न प्रांतों और नेपाल के अनेक प्रबुद्ध साहित्यकारों की उपस्थिति अविस्मरणीय रही।आयोजन के काव्य रचना-पाठ कार्यक्रम में सत्यदीप द्वारा गीत, कविता और गजल वाचन किया गया। इसी अवसर पर
सत्यदीप को काशी विश्वनाथ अंतर-राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित किया गया।
वाराणसी मे तीन दिवसीय भारत नेपाल अंतराष्ट्रीय साहित्य संस्कृति महोत्सव शुरू




















