Shri dungargarh : राज्य सरकार द्वारा गाँवों में सरकारी योजनाओं और सेवाओं को सुलभ पहुंच
श्रीडूंगरगढ़। राज्य सरकार द्वारा गाँवों में सरकारी योजनाओं और सेवाओं को सुलभ पहुंच, पारदर्शी एवं संवेदनशील सुशासन हेतु आमजन की परिवेदनाओं / समस्याओं के त्वरित निस्तारण की मंशानुरूप उपखण्ड क्षेत्र श्रीडूंगरगढ़ में 17 सितम्बर 2025 से शुरू होकर 21 नवम्बर 2025 तक सप्ताह के तीन दिन गुरुवार, शुक्रवार एवं शनिवार को आयोजित शिविरों में नोडल अधिकारी एवं उपखण्ड अधिकारी श्री शुभम शर्मा के पर्यवेक्षण में 16 विभागों के कुल 43 प्रकार के कार्य पात्रतानुसार संपादित किए गए। ग्राम पंचायतों में आधारभूत सुविधाओं यथा बिजली, पानी, चिकित्सा एवं शिक्षा के संस्थागत कार्यों की गुणवत्ता की समीक्षा कर आमजन से परिवाद प्राप्त कर संबंधित विभागों के माध्यम से त्वरित सकारात्मक निस्तारण की कार्यवाही की गई तथा लंबित परिवादों को प्रकृत्यनुसार यथाशीघ्र निस्तारण हेतु विभागों को निर्देशित किया गया। आयोजित शिविरों में राजस्व विभाग के कार्यों में ‘भू-राजस्व अधिनियम 1956 की धारा 136 के तहत् राजस्व रिकॉर्ड में शुद्धिकरण के कुल प्राप्त 767 प्रार्थना-पत्रों का निस्तारण किया गया। भू-राजस्व अधिनियम की इस धारा में भू अभिलेख अधिकारी को राजस्व अभिलेख में त्रुटियों के सुधार हेतु हितबद्ध पक्षकार की स्वीकृ ति से अशुद्ध प्रविष्टियों को शुद्ध दर्ज करने का अधिकार देती है। उपखण्ड अधिकारी श्री शर्मा ने राजस्व विवादों से बचने के लिए कुछ सुझाव दिए

पारिवारिक विवादों से बचने के लिए संयुक्त / पुश्तैनी भूमि का राजकीय लाभों से वंचित न रहें ।
संयुक्त खातेदारी जल्द समाप्त करें समय पर बंटवारा करवा लेना चाहिए
• भूमि विवादों से पहले रास्ते की पुष्टि करें सुनिश्चित कर राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज कराना बटवारे के समय ही भूमि तक जाने के लिए रास्ते को चाहिए ।
• विवादों से बचने के लिए समझदारी से काम लें – भूमि बेचने या विरासत में मिलने के बाद पारिवारिक सदस्यों में रास्ते को लेकर विवाद बढ़ते हैं, जिससे रिश्ते खराब होते हैं और न्यायालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
• न्यायालय में जाने से पहले सोचें – भूमि विवादों के कारण वर्षों तक मुकदमे चलते हैं, जिससे पारिवारिक संबंध टूट जाते हैं और आर्थिक नुकसान होता है
• भाई-बहन के रिश्ते बनाए रखें उत्तराधिकार कानून के तहत बहनों द्वारा दायर किए गए मुकदमों से परिवारों में दरार आ सकती है, जिससे संबंधों में कटुता आ जाती है।
• रास्ते संबंधी मामलों में सहयोग करें भूमि पर पहुंचने के लिए रास्ते की आवश्यकता को समझते हुए पारिवारिक व पड़ोसी विवादों को बढ़ावा न दें
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उपखण्ड अधिकारी शुभम शर्मा ने बताया कि यदि लोग समय रहते आपसी सहमति से अपने भूमि संबंधी विवादों को हल कर लें, तो न केवल आर्थिक और मानसिक तनाव से बच सकते हैं, बल्कि पारिवारिक रिश्तों को भी मजबूत बनाए रख सकते हैं।
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