Shri dungargarh : “बाल विवाह एक अभिशाप”: बालिका लाइब्रेरी में छात्राओं ने ली बाल विवाह के विरोध की शपथ
श्री डूंगरगढ़ (देवनारायण कॉलोनी): तालुका विधिक सेवा समिति, श्री डूंगरगढ़ के तत्वावधान में आज गुरुवार (29 जनवरी) को बालिका स्वाध्याय निःशुल्क लाइब्रेरी में ‘बाल विवाह के दुष्परिणाम और कानूनी प्रावधान’ विषय पर एक विशेष विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।
शिविर को संबोधित करते हुए विधिक सेवा समिति के सदस्य बलराम बेनीवाल ने कहा कि बाल विवाह केवल एक सामाजिक कुप्रथा नहीं, बल्कि कानूनन अपराध है। उन्होंने छात्राओं को विस्तार से समझाया कि कैसे कम उम्र में शादी एक बच्ची की शिक्षा को बाधित करती है और उसे आत्मनिर्भर बनने से रोकती है।

मुख्य बिंदु जिन पर चर्चा हुई:
मातृ स्वास्थ्य: बेनीवाल ने बताया कि 18 वर्ष से कम उम्र में गर्भधारण करना जच्चा और बच्चा दोनों की जान के लिए खतरनाक है।
मानसिक तनाव व घरेलू हिंसा: कम उम्र में गृहस्थी का बोझ पड़ने से बच्चियां मानसिक अवसाद और घरेलू हिंसा का शिकार हो जाती हैं।
कानूनी जानकारी: छात्राओं को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 की जानकारी दी गई और बताया गया कि बाल विवाह करवाने वाले और उसमें शामिल होने वाले सभी लोग सजा के हकदार हैं।
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कार्यक्रम के दौरान छात्राओं ने प्राचीन भारत की विदुषी महिलाओं और आधुनिक भारत की सफल बेटियों (जैसे रूमा देवी, अवनी लेखरा) के उदाहरणों से प्रेरणा ली। अंत में, उपस्थित सभी छात्राओं ने हाथ उठाकर शपथ ली कि वे न बाल विवाह करेंगी और न ही अपने आस-पास ऐसा होने देंगी।
लाइब्रेरी निदेशक योगगुरु ओमप्रकाश कालवा ने विधिक सेवा समिति, Adv राजु राम लुखा का आभार प्रकट किया और सब के लिए फलाहार की व्यवस्था की।
इस अवसर पर लाइब्रेरी का माहौल बहुत ही अनुशासित और उत्साहजनक रहा।
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