अलवर: हम जो खाना खा रहे हैं और चाय-दूध पी रहे हैं, वह कितना शुद्ध है और कितना मिलावटी, यह पता लगाने के लिए अलवरवासियों को अब लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा. स्वास्थ्य विभाग जिले में एक और नई फूड टेस्टिंग लैब बनाने जा रहा है. इसके शुरू होने से खाद्य सामग्री की जांच प्रक्रिया में तेजी आएगी. वहीं, खाद्य सामग्री में मिलावट करने वालों पर कार्रवाई आसान हो सकेगी. अभी जिले में एक फूड टेस्टिंग लैब है, जिस पर सालाना एक हजार से ज्यादा नमूनों की जांच का भार है. वैसे जिले में खाद्य सामग्री में मिलावट का हाल यह है कि वर्ष 2025 में अब तक 467 सेम्पल लिए गए, जिनमें 147 नमूने अमानक मिले.
बड़ा जिला, एक और लैब: सीएमएचओ डॉ. योगेन्द्र कुमार शर्मा ने बताया कि अलवर जिला बड़ा है. लंबे समय से एक फूड टेस्टिंग लैब प्रस्तावित थी. सरकार से अब मंजूरी मिल गई है. फूड लैब निर्माण के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से मूंगस्का क्षेत्र में जमीन चिह्नित की है. जल्द इसके टेंडर जारी करेंगे. जिले में एक और लैब बनने से खाद्य पदार्थों की जांच का दायरा बढ़ेगा. मिलावटखोरों पर कार्रवाई आसान हो सकेगी. नई फूड लैब में आधुनिक उपकरण व मशीनें आएंगी. इससे नमूनों की जांच गुणवत्तापूर्वक हो सकेगी.
रिपोर्ट में देरी: स्वास्थ्य विभाग जिले में हर साल दूध, मावा, पनीर, मिठाई, मसाले, तेल और अन्य खाद्य पदार्थों के एक हजार से ज्यादा नमूने लेता है. अब तक जिले में नमूनों की जांच की सीमित सुविधा होने से रिपोर्ट आने में देरी होती थी. नई लैब शुरू होने के बाद ज्यादा जांच हो सकेगी. समय पर रिपोर्ट भी मिलेगी.
इसलिए थी जरूरत: जिले में सिंथेटिक दूध, मावा और पनीर, मसालों, खाद्य तेलों में मिलावट की समस्या पुरानी है. यहां मिलावटी दूध व मावा उत्पादों का जाल इस कदर फैला है कि जिला ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों तक इनकी आपूर्ति यहां से होती है. विभाग समय-समय पर मिलावट के खिलाफ अभियान चलाता है. खासकर दीपावली, होली व अन्य त्योहारों पर. जांच के लिए खाद्य पदार्थों के नमूने लिए जाते हैं, लेकिन जिले में एक फूड टेस्टिंग लैब व सीमित संसाधन के कारण सेम्पल की जांच में लंबा समय लगता. इस कारण मिलावट की रिपोर्ट समय पर नहीं मिल पाती. लोगों को मजबूरी में मिलावटी खाद्य पदार्थ का सेवन करना पड़ता.
हर तीसरे व चौथे सेम्पल में मिलावट: जिले में स्वास्थ्य विभाग के फूड सेम्पल में हर तीसरा व चौथा नमूना मिलावटी पाया जाता है. विभागीय रिपोर्ट के अनुसार जिले में वर्ष 2024 में करीब 907 फूड सेम्पल लिए. इनमें 390 फेल मिले. वर्ष 2025 में 31 अगस्त तक 467 में से 147 नमूने फेल पाए गए.
पनीर में सर्वाधिक मिलावट: खाद्य नमूनों की जांच में ज्यादा मिलावट दूध से बने उत्पादों में मिली है. पनीर में सबसे ज्यादा और उसके अलावा दूध, घी, मावा आदि में भी मिलावट पाई गई. मसालों में भी मिलावट मिली. मसालों में ज्यादा रंग की मिलावट पाई गई.
स्वास्थ विभाग के सेम्पल
| माह | 2024 | 2025 |
| जनवरी | 64 | 48 |
| फरवरी | 73 | 74 |
| मार्च | 96 | 57 |
| अप्रैल | 63 | 122 |
| मई | 111 | 85 |
| जून | 51 | 32 |
| जुलाई | 67 | 48 |
| अगस्त | 69 | – |
| सितंबर | 59 | – |
| अक्टूबर | 163 | – |
| नवंबर | 43 | – |
| दिसंबर | 48 | – |
2024 में सेम्पल- 907
- फेल सेम्पल- 390
2025 में सेम्पल – 467
- सब स्टैंडर्ड- 120
- अनसेफ-27
- कुल फेल सेम्पल-147




















