नई दिल्ली: भारत ने बुधवार (20 अगस्त) को ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) से इंटरमीडिएट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल ‘अग्नि-5’ का सफल परीक्षण किया। यह परीक्षण रणनीतिक बल कमान (Strategic Forces Command) की देखरेख में किया गया।
रक्षा मंत्रालय ने जानकारी दी कि 20 अगस्त 2025 को हुआ यह परीक्षण सभी तकनीकी और परिचालन मानकों पर खरा उतरा।
DRDO ने किया है विकसित:
‘अग्नि-5’ भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित की गई है। यह अग्नि मिसाइल सीरीज का सबसे एडवांस मिसाइल है और भारत की न्यूक्लियर डिटरेंस कैपेबिलिटी (परमाणु प्रतिरोधक क्षमता) को और मजबूत बनाता है।
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अग्नि-5’ की क्या है खासियतें:
यह मिसाइल न्यूक्लियर वारहेड्स ले जाने में सक्षम है।
इसमें MIRV (Multiple Independently Targetable Re-entry Vehicle) तकनीक मौजूद है।
MIRV तकनीक से एक ही मिसाइल में कई वारहेड लगाए जा सकते हैं।
प्रत्येक वारहेड अलग-अलग टारगेट को निशाना बना सकता है।
इससे भारत की सामरिक क्षमता कई गुना बढ़ जाती है:
‘अग्नि-5’ का सफल परीक्षण भारत की रक्षा क्षमताओं में बड़ा कदम माना जा रहा है। यह न केवल पड़ोसी देशों के खिलाफ भारत की न्यूक्लियर डिटरेंस स्ट्रैटेजी को और सशक्त बनाता है, बल्कि वैश्विक मंच पर भी भारत की रक्षा प्रौद्योगिकी की शक्ति को दर्शाता है।




















