जयपुर: देशभर में महिलाओं के लिए सबसे खतरनाक बीमारियों में से एक सर्वाइकल कैंसर पर रोकथाम के लिए जयपुर में बड़ा अभियान शुरू किया गया है. आंकड़ों के अनुसार, सर्वाइकल कैंसर देश का दूसरा सबसे कॉमन कैंसर है और हर तीन मरीज महिलाओं में से एक की मौत हो जाती है. हालांकि देश में सर्जरी, कीमो और बेस्ट ट्रीटमेंट जैसी सुविधाएं मौजूद हैं, लेकिन जागरूकता की कमी के कारण महिलाओं को समय रहते बचाया नहीं जा पाता.
इसी को ध्यान में रखते हुए ग्रेटर नगर निगम ने पहल की है. निगम ने पहले 15 से 17 मार्च तक शक्ति वंदन कार्यक्रम के दौरान लगभग 500 छात्राओं का निशुल्क टीकाकरण करवाया था. अब इस पहल को आगे बढ़ाते हुए महिला स्वच्छता योद्धाओं और उनकी बेटियों को भी वैक्सीनेशन कार्यक्रम से जोड़ा गया है. इसके लिए निगम के सभासद भवन में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें कैंसर स्पेशलिस्ट महिला डॉक्टरों ने भाग लिया.
सर्वाइकल कैंसर के लक्षण और टेस्ट की अहमियत: एसएमएस अस्पताल की कैंसर सर्जन डॉ नैना अग्रवाल ने महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि यदि बच्चेदानी के मुंह से गंदा पानी, खून आना या दर्द जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. उन्होंने बताया कि यदि कैंसर पहली या दूसरी स्टेज में पकड़ में आ जाए तो उसका 100% इलाज संभव है. खासकर 30 वर्ष से ऊपर की महिलाओं को पेप्समियर टेस्ट जरूर कराना चाहिए.
डॉ नैना अग्रवाल ने यह भी स्पष्ट किया कि सर्वाइकल कैंसर की वैक्सीन 9 से 26 साल की लड़कियों के लिए उपलब्ध है. इसमें 9 से 14 वर्ष की आयु सबसे उपयुक्त है, जिसमें केवल 2 डोज की जरूरत होती है. वहीं 14 से 26 वर्ष तक की उम्र में 3 डोज जरूरी हैं. उन्होंने जोर दिया कि युवती को शादी से पहले वैक्सीन लगवाना चाहिए ताकि पूरी सुरक्षा मिल सके. डॉ निधि गोयल ने कहा कि टीका लगवाने के बाद भी 30 साल से अधिक उम्र की महिलाओं को हर 3 साल में सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग टेस्ट कराते रहना चाहिए.
निगम ने कैंसर जागरूकता को बताया प्राथमिकता: इस अवसर पर ग्रेटर नगर निगम की महापौर सौम्या गुर्जर ने कहा कि कैंसर को हराने और भारत को जिताने के लिए लगातार प्रयास हो रहा है. उन्होंने कहा कि निगम उनका परिवार है और स्वच्छता योद्धा उसी परिवार का हिस्सा हैं, इसलिए जागरूकता की शुरुआत वहीं से की गई है. पिछली बार स्कूलों और स्वच्छता योद्धाओं की बेटियों को पहली डोज दी गई थी. अब दूसरी डोज लगाने का समय आ गया है और जिनको पहली डोज नहीं मिली, उन्हें भी इसमें शामिल किया जाएगा. महापौर ने कहा कि कैंसर के बारे में समाज में बहुत सी भ्रांतियां और भ्रम फैले हुए हैं. जब इन पर खुलकर चर्चा होगी तभी समाधान संभव है. इसलिए जागरूकता बढ़ाना ही सबसे पहला कदम है.
विशेषज्ञों ने साझा किए विचार: कार्यक्रम में डॉ नैना अग्रवाल, डॉ निधि गोयल और डॉ सुदीप्ति अरोड़ा ने महिला स्वच्छता योद्धाओं के साथ अपने विचार साझा किए और बताया कि सही समय पर वैक्सीन और टेस्टिंग से सर्वाइकल कैंसर पर पूरी तरह नियंत्रण पाया जा सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि 9 से 14 साल की बच्चियों को 6 महीने के अंतराल पर 2 डोज लगती हैं और बड़ी उम्र में 3 डोज जरूरी हैं. निगम ने साफ किया है कि स्कूल की बच्चियों और स्वच्छता योद्धाओं की बेटियों को यह वैक्सीनेशन मुफ्त उपलब्ध कराया जाएगा और खर्चा निगम वहन करेगा. उद्देश्य यही है कि जागरूकता की जड़ से शुरुआत हो ताकि आने वाली पीढ़ी इस खतरनाक बीमारी से बच सके.




















