कुचामनसिटी: डीडवाना-कुचामन जिला पुलिस की ओर से साइबर क्राइम के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है. इसी क्रम में 25 अगस्त को मौलासर थाना पुलिस ने एक सिंडिकेट साइबर गैंग का पर्दाफाश करते हुए 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया था. वहीं, अब डीडवाना थाना पुलिस ने भी बड़ी कार्रवाई करते हुए एक संगठित साइबर गिरोह के मुख्य सरगना सहित छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है. इन आरोपियों के खिलाफ पुलिस को 36 करोड़ रुपए की साइबर शिकायतें मिली हैं. साथ ही 7 बैंक पासबुक, दो एटीएम कार्ड और पांच मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं.
डीडवाना एसपी रिचा तोमर ने शुक्रवार को इस संगठित साइबर फ्रॉड गैंग के खुलासे की जानकारी दी. एसपी ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी कमीशन के बदले अपने मुख्य सरगना के लिए साइबर फ्रॉड का काम करते थे. यह आरोपी आम लोगों को लालच और झांसा देकर उनके बैंक खाते व एटीएम कार्ड अपने कब्जे में ले लेते थे और ठगी की रकम उनके खातों में मंगवाते थे. फिर उन खातों से यह रकम निकालकर अपने सरगना को दे देते थे.
उन्होंने बताया कि पिछले दिनों साइबर सेल को संदिग्ध बैंक खातों की शिकायतें मिली थीं. इस पर एसपी ने डिप्टी एसपी धरम पूनिया व थाना अधिकारी राजेंद्र सिंह के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन कर कार्रवाई के निर्देश दिए. टीम ने फील्ड इंटेलिजेंस व टेक्निकल तरीके से जांच शुरू की. इसी दौरान पुलिस को सूचना मिली कि इस साइबर फ्रॉड गैंग का सरगना पंकज मुंडा अपने साथियों के साथ मिलकर लोगों के बैंक खातों के माध्यम से ठगी की रकम का लेन-देन करता है. इस पर पुलिस ने तुरंत पंकज मुंडा के ठिकाने पर दबिश दी. यहां पंकज मुंडा व उसके साथी एक काले रंग की एसयूवी कार में बैठकर साइबर ठगी की गतिविधियों को अंजाम देते हुए मिले. इस दौरान पुलिस को देखते ही आरोपियों ने भागने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने घेराबंदी कर सभी छह आरोपियों पंकज मुंडा, समीर शेख, गिरधारी कड़वासरा, मोहम्मद शरीफ, शोहैब खान और अरबाज खान को गिरफ्तार कर लिया.
एसपी ने बताया कि आरोपी आपराधिक षड्यंत्र के तहत एक संगठित साइबर गिरोह के रूप में कार्य करते हुए लोगों को कमीशन के झांसे में लेकर उनके बैंक खाते, एटीएम कार्ड, पासबुक, सिम कार्ड एवं संबंधित दस्तावेज अपने कब्जे में ले लेते थे. इसके बाद साइबर ठगी की राशि को ऑनलाइन या स्कैनर के माध्यम से इन खातों में डलवाकर एटीएम, चेक, ई-मित्र व अन्य माध्यमों से रकम निकालकर मुख्य सरगना तक पहुंचाते थे. इसके बदले आरोपियों को कमीशन प्राप्त होता था. आरोपियों के खातों की जांच से अब तक देश के विभिन्न राज्यों में करीब 36 करोड़ रुपए से अधिक की साइबर शिकायतें दर्ज होना पाया गया है, जिनके संबंध में पुलिस जांच कर रही है.




















