जयपुर: प्रदेश में कांग्रेस की विचारधारा, रीति नीति, कल्चर और कांग्रेस सेवादल की नीतियों का पाठ पढ़ने के लिए प्रदेश के सभी जिलों में सोमवार से तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर शुरू किया जा रहे हैं. यह प्रशिक्षण शिविर 11 अगस्त से शुरू होकर 11 अक्टूबर को समाप्त होंगे. प्रशिक्षण शिविरों के जरिए कांग्रेस सेवादल 20 हजार नए श्वेत सैनिक तैयार करेगी.
रविवार को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में इस बारे में कांग्रेस सेवादल के प्रदेश अध्यक्ष हेम सिंह शेखावत ने प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि कल से सभी जिलों में तीन दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण शिविर शुरू हो रहा है. जो प्राथमिक प्रशिक्षण शिविर है. शिविर में राष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षक और कांग्रेस विचारधारा से जुड़े बुद्धिजीवी कार्यकर्ताओं को पार्टी की रीति, इतिहास, कल्चर और कांग्रेस सेवादल के आजादी में योगदान को लेकर जानकारी देंगे. इसके अलावा देश के ज्वलंत मुद्दों को लेकर भी कार्यकर्ताओं से संवाद किया जाएगा.
उन्होंने कहा कि हम प्रचारक नहीं विचारक तैयार करेंगे. प्रचारक तो आरएसएस तैयार करती है, जो अपने स्वार्थ के लिए काम करते हैं. हम विचारक तैयार करेंगे, जो गांव-गांव, गली-गली जाकर लोगों को बताएंगे कि आज किस तरह से देश का संविधान और लोकतंत्र खतरे में है. उन्होंने कहा कि जिस तरह से 1923 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने श्वेत सैनिकों को तिरंगा और राष्ट्र को बचाने की जिम्मेदारी दी थी, उसी तरह से आज राजस्थान कांग्रेस सेवादल के कार्यकर्ता प्रशिक्षण शिविर के जरिए नई फौज तैयार करेंगे. शेखावत ने कहा कि प्रशिक्षण शिविर में कार्यकर्ताओं में विचारधारा का प्रवाह करने और एक ऐसी संविधान रक्षक फौज तैयार करेंगे जो राहुल गांधी के विचार और कदमों के साथ कदमताल करेगी.
संवैधानिक संस्थाओं और पदों का दुरुपयोग: हेम सिंह शेखावत ने कहा कि वर्तमान समय में केंद्र सरकार द्वारा संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग किया जा रहा है. ऐसा लगता है कि केंद्र की भाजपा ने सरकार की भारत के लोकतंत्र और संविधान को तहस-नहस करने की मंशा है. उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने पूर्व राज्यपाल कमला बेनीवाल और सत्यपाल मलिक के निधन होने पर उनको राजकीय सम्मान नहीं दिया, जबकि दोनों ही राज्यपाल संवैधानिक पदों पर थे. कमला बेनीवाल आजादी के आंदोलन के दौरान आजादी के लिए जेल गई और फ्रीडम फाइटर रहीं. उन्होंने गुजरात में राज्यपाल रहते हुए संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग नहीं होने दिया.
उन्होंने कहा कि पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक चार राज्यों के राज्यपाल रहे. जब वे पदों पर रहे, तो उन्होंने कभी संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग नहीं होने दिया. चाहे वो गोवा हो, या कश्मीर हो. इसके अलावा हाल ही में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को जिस तरह से हटाया गया और उसके बाद उनका विदाई समारोह भी नहीं हुआ. यह सीधे-सीधे संवैधानिक गरिमा कम करने का प्रयास है.




















