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CAG ने माना कि ठेकेदारों को दिया गया 73.73 करोड़ का अनुचित लाभ, जानिए क्या है मामला

चंडीगढ : नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने हरियाणा में वर्ष 2019 से 2022 के बीच विभिन्न विभागों, स्वायत्त निकायों और सार्वजनिक उपक्रमों द्वारा निष्पादित 98 सार्वजनिक कार्यों में भारी लागत वृद्धि को लेकर गंभीर अनियमितताओं की ओर इशारा किया है। इन परियोजनाओं की लागत मूल अनुबंध राशि से 50% से लेकर 500% से अधिक तक बढ़ गई। रिपोर्ट के अनुसार, जिन कार्यों को कुल ₹1,134.53 करोड़ की लागत से स्वीकृत किया गया था, वे ₹1,997.28 करोड़ में पूर्ण हुए। इसमें 40 कार्य ऐसे थे जिनकी लागत 50% तक बढ़ी, 27 कार्यों में 50–100% की वृद्धि हुई, 27 अन्य कार्यों में 100–500% की बढ़ोतरी देखी गई, जबकि 4 परियोजनाओं में लागत 500% से भी अधिक बढ़ गई।

सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि हरियाणा लोक निर्माण विभाग (PWD) के नियमों के अनुसार यदि किसी परियोजना की लागत में 10% से अधिक वृद्धि होती है तो इसके लिए संशोधित प्रशासनिक स्वीकृति लेना अनिवार्य होता है। परंतु अनेक मामलों में यह प्रक्रिया नजरअंदाज कर दी गई। PWD (B&R) के इंजीनियर-इन-चीफ के कार्यालय ने बिना विस्तृत संशोधित अनुमानों और औपचारिक स्वीकृति के ही भारी-भरकम भुगतान जारी कर दिए।

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रिपोर्ट में कई परियोजनाओं के उदाहरण भी दिए गए हैं, जिनमें सबसे प्रमुख है अंबाला छावनी में बना स्टेडियम, जिसे ₹45.58 करोड़ की अनुमानित लागत पर ₹40.49 करोड़ में आवंटित किया गया था, लेकिन मई 2021 तक इस पर ₹114.03 करोड़ खर्च किए जा चुके थे, जबकि परियोजना अब तक अधूरी है। इंजीनियरों की एक समिति ने जांच में पाया कि ₹65.38 करोड़ का भुगतान अनावश्यक रूप से किया गया था, जिसमें अधूरी और गैर-अनुसूचित मदों पर अधिक दरें शामिल थीं, और यह बिना उच्च अधिकारियों की अनुमति के किया गया।

इसी प्रकार, करनाल के घरौंडा स्थित एनसीसी अकादमी के पहले चरण के लिए ₹17.91 करोड़ स्वीकृत किए गए थे, परंतु सितंबर 2020 तक ₹42.17 करोड़ खर्च किए जा चुके थे, जबकि काम रुका हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, कार्य शुरू करने से पहले स्थल की समुचित जांच नहीं की गई, जिससे लागत में अप्रत्याशित वृद्धि हुई। इसी तरह, करनाल की कल्पना चावला मेडिकल यूनिवर्सिटी में सीमा दीवार का कार्य ₹21.66 करोड़ में आवंटित हुआ था, जो बाद में ₹36.96 करोड़ तक पहुंच गया। ये सभी तीनों कार्य एक ही ठेकेदार को दिए गए थे।

इसके अलावा, अंबाला में बनाए जा रहे युद्ध स्मारक की लागत ₹189.41 करोड़ से बढ़कर ₹362.56 करोड़ हो गई — जो कि लगभग 91.4% की वृद्धि है। जनस्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के अंतर्गत कुछ परियोजनाओं में ई-टेंडरिंग से बचने के लिए निविदाएं ₹1 लाख से कम रखी गईं, जिन्हें बाद में बढ़ा दिया गया। पांच ऐसे कार्यों की लागत ₹77.89 करोड़ से बढ़कर ₹178.13 करोड़ हो गई, वहीं अन्य 14 परियोजनाओं में ₹108.91 करोड़ की स्वीकृति के विरुद्ध ₹255.70 करोड़ खर्च किए गए — वह भी बिना आवश्यक प्रशासनिक अनुमोदन के।

सीएजी ने यह भी उजागर किया कि ठेकेदारों को ₹73.73 करोड़ का अनुचित लाभ दिया गया, जिसमें अधिक दरों पर भुगतान शामिल था। अब तक मात्र ₹6.64 करोड़ की ही वसूली की जा सकी है। इन तमाम उदाहरणों से यह स्पष्ट है कि कार्यों की निगरानी और प्रशासनिक नियंत्रण में गंभीर खामियां रही हैं। रिपोर्ट ने सार्वजनिक धन के दुरुपयोग और सरकारी नियमों की अनदेखी पर गंभीर चिंता जताई है।

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