Bhilwara : समाजसेवी एवं खेल प्रेमी सम्पत कोठारी ने अंतिम पंक्ति में खड़े जरूरतमंद के साथ मनाया लाडो का जन्मदिन
मानवता की मिसाल बना एक जन्मदिन, रोटी बैंक में बाँटी खुशियां
आत्मिक संतोष और वास्तविक आनंद तो तब मिलता है जब किसी भूखे को रोटी खिलाई जाए: सम्पत कोठारी
भीलवाड़ा (पंकज पोरवाल)।जब समाज में जन्मदिन और उत्सवों का स्वरूप भव्यता और दिखावे की ओर बढ़ता जा रहा है, वहीं एक सकारात्मक और प्रेरणादायक पहल ने मानवता की सच्ची तस्वीर प्रस्तुत की।
लाडो सेवा फाउंडेशन द्वारा संचालित रोटी बैंक में समाजसेवी एवं खेल प्रेमी सम्पत कोठारी ने अपनी प्यारी लाडो का जन्मदिन समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े जरूरतमंद भाइयों-बहनों के साथ मनाया। इस अवसर पर जरूरतमंदों को प्रेमपूर्वक भोजन वितरित किया गया। बच्चों के चेहरे पर मुस्कान और वृद्धजनों की आंखों में आशीर्वाद के भाव ने पूरे वातावरण को भावुक बना दिया। उपस्थित जनों ने अनुभव किया कि सच्ची खुशी बाँटने में है, संग्रह करने में नहीं। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सम्पत कोठारी ने कहा कि आज की चकाचौंध भरी जिंदगी में लोग अपने विशेष दिन महंगे होटल और रिसोर्ट में मनाते हैं, लेकिन आत्मिक संतोष और वास्तविक आनंद तो तब मिलता है जब किसी भूखे को रोटी खिलाई जाए।

उन्होंने कहा कि यह जन्मदिन उनके परिवार के लिए सदैव यादगार रहेगा क्योंकि आज उनकी लाडो ने सेवा और संवेदनशीलता का मूल्य सीखा है। संस्था के संस्थापक लक्ष्मण सिंह राठौड़ ने बताया कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिया गया प्रेरक मंत्र “मेरा भारत, मेरा परिवार” केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है। यदि भारत हमारा परिवार है तो हमारे परिवार का कोई भी सदस्य भूखा न सोए, यह सुनिश्चित करना समाज के प्रत्येक सक्षम व्यक्ति का कर्तव्य है। इसी उद्देश्य से लाडो सेवा फाउंडेशन का रोटी बैंक पिछले सात वर्षों से निरंतर, निस्वार्थ भाव से सेवा में लगा हुआ है।
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उन्होंने समाज के सभी जागरूक नागरिकों, युवाओं और परिवारों से आह्वान किया कि वे अपने शुभ अवसर जन्मदिन, वर्षगांठ या अन्य उत्सव-जरूरतमंदों के साथ मनाकर सेवा के इस अभियान का हिस्सा बनें। इस अवसर पर लाडो की गंगा सुवालका, संध्या स्वाइन, संध्या यादव, कोमल कुमावत, अर्चना सहित कई बालिकाओं ने पूरे समर्पण और उत्साह के साथ सेवा कार्य में सहयोग किया। बालिकाओं की सेवा भावना ने यह संदेश दिया कि संस्कार और संवेदना ही समाज की वास्तविक पूंजी हैं। कार्यक्रम के अंत में जरूरतमंदों ने आशीर्वाद देते हुए संस्था एवं परिवार के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। यह आयोजन केवल एक जन्मदिन उत्सव नहीं, बल्कि मानवता, संवेदना और सामाजिक जिम्मेदारी का प्रेरक संदेश बन गया।
Bhilwara : समाजसेवी एवं खेल प्रेमी सम्पत कोठारी ने अंतिम पंक्ति में खड़े जरूरतमंद के साथ मनाया लाडो का जन्मदिन




















