बीकानेर : सनातन धर्म शास्त्रों में हर तिथि वार त्यौहार का अपना एक महत्व है. भगवान विष्णु की आराधना के लिए एकादशी तिथि का महत्व शास्त्रों में बताया गया है. भाद्रमास की एकादशी को जलझूलनी एकादशी कहा जाता है. इसे परिवर्तिनी एकादशी और पद्मा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है. इस बार 3 सितंबर को एकादशी तिथि है. पंडित आनंद व्यास कहते हैं कि इस दिन भगवान विष्णु के वामन रूप की पूजा होती है और इस दिन एकादशी करने पर कई यज्ञ करने का फल प्राप्त होता है.
करवट बदलते भगवान विष्णु : दरअसल, चातुर्मास यानी देवशयनी एकादशी से देवउठनी एकादशी तक भगवान विष्णु योग निद्रा में रहते हैं और मान्यता है कि जलझूलनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु योग निद्रा में करवट बदलते हैं, इसलिए इस दिन को परिवर्तनी एकादशी के रूप में भी जाना जाता है. इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा अर्चना करनी चाहिए और इस दिन को पद्मा एकादशी भी कहा जाता है.
करें ये कार्य : वैसे तो हर एकादशी तिथि के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा अर्चना करने का पुण्य फल मिलता है और इस दिन भगवान विष्णु की आराधना करने के लिए मंत्र जाप के अलावा विष्णु सहस्त्रनाम पाठ करने का महत्व है. भगवान विष्णु को अर्पित भोग में तुलसी पत्ता चढ़ाना चाहिए.
न करें ये कार्य : एकादशी तिथि के दिन चावल खाने से परहेज करना चाहिए. साथ ही किसी भी तरह का क्षोर कार्य दाढ़ी और बाल कटवाना नहीं चाहिए. इस दिन पेड़ के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए और तुलसी में जल नहीं खींचना चाहिए और तुलसी के पत्ते भी नहीं तोड़ने चाहिए.




















