जयपुर: पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार को गिराने की साजिशों को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक बार फिर बड़ा बयान दिया है. इस बार गहलोत ने भजनलाल सरकार में कैबिनेट मंत्री किरोड़ी लाल मीणा और नागौर से आरएलपी सांसद हनुमान बेनीवाल पर कांग्रेस की सरकार गिराने की साजिश में शामिल होने के आरोप लगाए हैं. गहलोत ने शनिवार को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में मीडिया से बातचीत में किरोड़ी लाल मीणा और हनुमान बेनीवाल के बीच चल रहे विवाद पर कहा कि राजस्थान में पैसा लेने का इतिहास नया नहीं है. किरोड़ी लाल मीणा और हनुमान बेनीवाल दोनों दोस्त थे और हमारी सरकार को गिराने की साजिश में शामिल थे. दोनों हेलीकॉप्टर लेकर राजस्थान में सरकार बनाने के लिए घूम रहे थे, यह इनका पुराना इतिहास है.
एसआई भर्ती के लिए सरकार ने दिया था शपथ पत्र: एसआई भर्ती परीक्षा रद्द होने को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि पौने दो साल में सरकार एसआई भर्ती पर कोई फैसला नहीं ले पाई. अब जब हाईकोर्ट ने इसका फैसला दिया है तो सरकार इसका स्वागत कर रही है, जबकि सरकार ने ही हाईकोर्ट में आधे एसआई को खुश करने के लिए शपथ पत्र दिया था कि भर्ती परीक्षा रद्द नहीं होनी चाहिए. गहलोत ने कहा कि हमारे समय में भी सेकंड ग्रेड की भर्ती हुई थी, उसका पेपर लीक होने की शिकायत एसओजी को मिली थी. तब 35,000 पोस्ट थीं और 76 लोगों के नाम सामने आए थे, लेकिन हमने जनहित में उस परीक्षा को रद्द कर दिया और 35,000 से बढ़ाकर 50,000 पोस्ट कर दी. दोबारा परीक्षा कराई और सबको नियुक्ति दे दी.
पेपर लीक की बीमारी जड़ से खत्म होनी चाहिए: पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि पेपर लीक एक बीमारी है जो आर्मी में भी है, ज्यूडिशरी के अंदर भी है. राजस्थान की ज्यूडिशरी में भी पेपर आउट हुए थे. गुजरात, बिहार, पंजाब सहित कई राज्यों में पेपर लीक की घटनाएं हुई हैं. वहां पर एक गैंग बन गई है जो पेपर लीक का काम करती है. उन्होंने कहा कि देश में बेरोजगारी फैल रही है और हर व्यक्ति सरकारी नौकरी पाना चाहता है, यह इसकी एक बुनियादी समस्या है. गहलोत ने कहा कि पेपर लीक मामलों को लेकर हमारी सरकार ने कड़े कदम उठाए थे. हमने पेपर लीक करने वालों पर 10 करोड़ रुपए का जुर्माना, आजीवन कारावास, संपत्ति कुर्क करने जैसे कड़े प्रावधान बनाए थे. ऐसा कानून बनाने वाला राजस्थान अकेला राज्य था. उन्होंने कहा कि एक पूर्व आईएएस की अध्यक्षता में हमने एक कमेटी बनाई थी और एसओजी में एंटी-चीटिंग सेल भी हमने ही बनाया था. गहलोत ने कहा कि पेपर लीक के मामले जड़ से खत्म होने चाहिए. गहलोत ने कहा कि इस मामले में राजनीति नहीं होनी चाहिए, क्योंकि भाजपा सरकार के समय भी आरपीएससी के मेंबर बने थे और हमारी सरकार में भी आरपीएससी के मेंबर बने थे. जो दो मेंबर पकड़े गए हैं, उनमें से एक बीजेपी सरकार के समय का भी है. उन्होंने कहा कि पेपर लीक को लेकर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप हो रहे हैं, यह तरीका भी ठीक नहीं है.
पेपर लीक मामलों की तह में जाना जरूरी: मुख्यमंत्री भजनलाल के ‘बड़े मगरमच्छों को पकड़े जाने’ के बयान पर गहलोत ने कहा कि यह कहने वाले मुख्यमंत्री कौन होते हैं? यह मामला एसओजी और हाईकोर्ट का है. आपने तो कोर्ट में जवाब तक नहीं दिया था. अब कोर्ट ने फैसला दे दिया है तो आप स्वागत कर रहे हैं. अब सरकार को पेपर लीक मामलों की तह में जाना चाहिए. पेपर लीक एक ऐसी बीमारी है, जिसकी जितनी निंदा की जाए, उतनी कम है.
बिहार में कांग्रेस कार्यकर्ताओं से मारपीट गलत: गहलोत ने बिहार में भाजपा कार्यकर्ताओं की ओर से कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ की गई मारपीट को लेकर कहा कि देश में यह एक नई परंपरा शुरू हो गई है, जो बंद होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में कोई पॉलिटिकल पार्टी के कार्यकर्ता किसी के ऑफिस में जाए, यह नियम गलत है. अगर आपको शिकायत है तो आप धरना दो, जुलूस निकालो, सड़कों पर नारेबाजी करो, कलेक्ट्रेट में प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति या राज्यपाल के नाम ज्ञापन दो, लेकिन एक-दूसरे के कार्यालय पर जाकर धावा बोलने की परंपरा शुरू हुई है, यह गलत है.
पीएम पर अभद्र टिप्पणी पर निंदा: बिहार में प्रधानमंत्री पर अभद्र टिप्पणी के सवाल पर गहलोत ने कहा कि कांग्रेस की यात्रा आगे निकल गई थी, किसी ने मंच पर जाकर कुछ अपशब्द बोल दिए, तो उसे कांग्रेस से नहीं जोड़ना चाहिए. वे बोले, ‘हम इस तरह के कृत्यों की निंदा करते हैं, लेकिन जिस तरह से राहुल गांधी को बिहार में असाधारण जन समर्थन मिला है, उससे घबराकर भाजपा अब इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप शुरू कर रही है, जो सही नहीं है.’
सर्वदलीय बैठक का बहिष्कार अच्छा निर्णय: विधानसभा में सर्वदलीय बैठक का बहिष्कार करने को लेकर अशोक गहलोत ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने अगर सर्वदलीय बैठक का बहिष्कार करने का फैसला लिया है तो सोच-समझकर ही लिया होगा. जिस तरह से सरकार एकतरफा फैसला ले रही है, स्पीकर और मुख्यमंत्री भी एकतरफा फैसला लेते हैं, जो उचित नहीं है. केवल एक दिन बुलाकर चर्चा कर लो, यह ठीक नहीं है, इसीलिए सोच-समझकर फैसला लिया गया है.




















