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पहाड़ों पर ‘आसमानी कहर’, जम्मू में अबतक 54 मौतें, उत्तराखंड-हिमाचल में कई घर जमींदोज, तबाही देख कांप जाएगा कलेजा

पहाड़ी राज्यों पर बारिश कहर बनकर बरस रही है. जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश-भूस्खलन के चलते हुई घटनाओं में अब तक कई लोगों की जान जा चुकी है. सैकड़ों लोग लापता हैं. इस आसमानी आफत ने कई लोगों के आशियाने उजाड़ दिए और उन्हें बेघर कर दिया. किसी से उसका बेटा छीन लिया तो किसी बच्चे से उसकी मां छीन ली. जम्मू-कश्मीर में अब तक बारिश-भूस्खलन से 54 लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं, उत्तराखंड में शुक्रवार को ही 6 लोगों की मौत हो गई. इसके साथ हिमाचल के चंबा में 10 लोगों की जान चली गई है.

जम्मू-कश्मीर में लगातार हो रही भारी बारिश और भूस्खलन ने हालात बेहद गंभीर बना दिए हैं. रामबन जिले के राजगढ़ क्षेत्र में बादल फटने से तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि अचानक आई बाढ़ में कई मकान जमींदोज हो गए. कुछ घर बाढ़ के तेज पानी में बह गए, जिससे इलाके में दहशत का माहौल है. वहीं रियासी के माहौर इलाके में भूस्खलन से बड़ी तबाही हुई, जहां पहाड़ का मलबा एक घर पर गिरने से सात लोगों की जान चली गई. हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है.

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जम्मू संभाग में सोमवार से अब तक मृतकों की संख्या 54 हो गई है

  • कटरा में 34 लोगों की मौत

  • रियासी में 7 लोगों की मौत

  • रामबन में 3 लोगों की मौत

  • जम्मू जिले में 5 मौतें (जिनमें 1 आर्मी जवान और 1 बीएसएफ जवान शामिल)

  • डोडा में 4 लोगों की मौत

  • कठुआ में 1 मौत

उत्तराखंड में शुक्रवार तड़के मूसलाधार बारिश से बादल फटने, बाढ़ आने और भूस्खलन की घटनाओं से मची तबाही में एक पति-पत्नी समेत छह लोगों की मौत हो गई और इस घटना में 11 लोग लापता हो गए. गुमशुदा लोगों की संख्या अभी बढ़ सकती है. घटना में कई लोग घायल भी हो गए. अधिकारियों ने जानकारी देते हुए बताया कि चमोली, रुद्रप्रयाग, टिहरी और बागेश्वर में प्राकृतिक आपदा का सबसे ज्यादा कहर बरपा, जहां कई मकान और मवेशी मलबे में दब गए, खेती की जमीन बर्बाद हो गई कई गाड़ियां भी बह गईं. यहां तक की कई गांवों से संपर्क तक टूट गया.

दो की हुई मौत और तीन लापता

उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (State Disaster Management Authority) के मुताबिक बागेश्वर के कपकोट के पौसारी गांव में तड़के तीन बजे भारी बारिश के कारण पहाड़ी से मलबा आने से पांच-छह मकान क्षतिग्रस्त हो गए, जिसकी वजह से दो महिलाओं की मौत हो गई और तीन लोग लापता हो गए. इस हादसे में मृतक महिलाओं की पहचान बसंती देवी जोशी और बचुली देवी के रूप में हुई है. वहीं लापता व्यक्तियों में बसंती देवी के पति रमेश चंद्र जोशी, गिरीश और पूरण जोशी के नाम शामिल हैं.

शुक्रवार को चमोली के थराली के देवाल क्षेत्र के मोपाटा गांव में भारी बारिश के कारण हुए भूस्खलन की चपेट में आने से पति-पत्नी की मौत हो गई. चमोली के जिलाधिकारी डॉ. संदीप तिवारी ने बताया कि मोपाटा में एक मकान और गौशाला भूस्खलन की चपेट में आ गए, जिससे उसमें रह रहे तारा सिंह और उनकी पत्नी कमला देवी की मौत हो गई. उन्होंने बताया कि मलबे में दबे विक्रम सिंह और उनकी पत्नी को बाहर निकाल लिया गया, लेकिन उन्हें चोटे आई हैं.

जिले में तीन जगहों पर बादल फटा

राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के मुताबिक गौशाला में बंधे करीब 25 मवेशी भी मलबे में लापता हो गए. अधिकारियों ने बताया कि रुद्रप्रयाग के बसुकेदार और जखोली क्षेत्रों के छह गांवों में लगातार बारिश, बादल फटने और भूस्खलन की घटनाओं ने भारी नुकसान पहुंचाया हैउन्होंने कहा कि जिले में तीन जगहों पर बादल फटेप्राधिकरण के मुताबिक रुद्रप्रयाग के आधा दर्जन गांवों-तालजामण, छेनागाड़, बड़ेथ, स्यूरं, किमाणा और अरखुंड में तड़के पौने चार बजे भारी बारिश से बरसाती नालों में पानी और मलबा आने से कुछ मकान और गौशाला क्षतिग्रस्त हो गए.

बाढ़ में 30-40 परिवार फंस गए

बरसाती नालों में बाढ़ आने से 30 से 40 परिवार फंस गए थे और अब तक वहां से 200 लोगों को निकाल कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया है. टिहरी के बालगंगा क्षेत्र के गेंवाली गांव में भारी बारिश से काफी नुकसान हुआ. हालांकि, इसमें कोई जनहानि नहीं हुई. गेंवाली गांव में दो मंदिर, दो छानियां और एक गौशाला, कृषि भूमि और गांव के संपर्क मार्ग क्षतिग्रस्त हो गए. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संबंधित जिलों के जिलाधिकारियों से बातचीत कर बचाव एवं राहत कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए.

लगातार बारिश से अलकनंदा और उसकी सहायक नदियों और मंदाकिनी नदी का जल स्तर लगातार बढ़ रहा है. बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर धारी देवी और रुद्रप्रयाग के बीच अलकनंदा नदी का पानी सड़क पर बहने लगा, जिसकी वजह से उस पर वाहनों का आवागमन रोकना पड़ा. पौड़ी की जिलाधिकारी स्वाति भदौरिया ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर मिनी गोवा बीच के पास सड़क पर पानी भरने के बाद वाहनों की आवाजाही रोक दी गई और यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रोक लिया गया. हालांकि, करीब दो घंटे बाद नदी का जलस्तर सामान्य होने के बाद मार्ग को खोल दिया गया.

भारी बारिश का ‘रेड अलर्ट’

नदी का जलस्तर बढ़ने पर एहतियातन धारी देवी क्षेत्र की दुकानों और नदी के किनारे स्थित छह स्कूलों को तुरंत बंद करवा दिया गया. अब मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों में उत्तराखंड के बागेश्वर, चमोली, देहरादून और रुद्रप्रयाग जिलों के लिए भारी से बहुत भारी बारिश का ‘रेड अलर्ट’ और चंपावत, हरिद्वार, पिथौरागढ़, उधमसिंह नगर, उत्तरकाशी जिलों के लिए बारिश का ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया है.

हिमाचल में भी 10 लोगों की मौत

इस मानसून सीजन में प्राकृतिक आपदाओं ने उत्तराखंड और हिमाचल पर बहुत कहर बरपाया है. हिमाचल प्रदेश के चंबा में भीषण बारिश और भूस्खलन के चलते 24 अगस्त से अब तक मणिमहेश तीर्थयात्रियों समेत 10 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि आठ घायल हो गए हैं और चार लोग अब भी लापता हैं. इन घटनाओं के चलते भारी नुकसान हुआ है. अधिकारियों ने जानकारी देते हुए बताया कि मृतकों की पहचान दर्शना देवी, सलोचना, कविता, रेखा देवी, सागर भटनागर और दो बच्चों के रूप में हुई है. बाकी तीन, अमन, रोहित और अनमोल की ऑक्सीजन की कमी के कारण मौत हो गई.

भरमौर विधानसभा क्षेत्र सबसे ज़्यादा प्रभावित

चंबा के अतिरिक्त जिलाधिकारी अमित मिश्रा ने शुक्रवार को बताया कि पिछले तीन दिनों से सैटेलाइट फ़ोन और पुलिस वायरलेस ही संचार का एक जरिया थे, लेकिन अब भरमौर को छोड़कर ज़्यादातर हिस्सों में मोबाइल नेटवर्क बहाल कर दिया गया है. अधिकारियों का कहना है कि भरमौर विधानसभा क्षेत्र में सबसे ज़्यादा प्रभावित हुआ है. कई जगहों पर भूस्खलन के कारण यह राज्य के बाकी हिस्सों से कट गया है. राशन और अन्य ज़रूरी सामान चंबा शहर से भरमौर पहुंचाया जा रहा है, जहां ये सामान चार दिन बाद शुक्रवार को पहुंचे.

भरमौर में मणिमहेश के कई श्रद्धालु फंसे हुए हैं. इस बीच, भरमौर और चंबा के बीच टूटे हुए रास्ते पर पैदल चल रहे तीर्थयात्रियों के वीडियो इंटरनेट पर सामने आए हैं, जिनमें लोग भूस्खलन प्रभावित सड़कों से गुजरते हुए दिखाई दे रहे हैं. भरमौर से चार दिन बाद वापस लौटे चंबा के एक निवासी ने कहा, मौसम की चेतावनी के बाद भी न तो कोई प्रशासन था और न ही कोई आपदा प्रबंधन. लोग अपनी गाड़ियां, दोपहिया वाहन छोड़कर पैदल ही चल पड़े. न तो सड़क थी और न ही मोबाइल कनेक्टिविटी. टूटते पहाड़ और नीचे गरजती रावी नदी, पैदल चलना बहुत मुश्किल था. अब भी हज़ारों महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग और युवा गौरीकुंड से बग्गा तक फंसे हुए हैं. उम्मीद है कि उन्हें बचा लिया जाएगा. भरमौर से कलसुई जाने वाली सड़क लगभग तबाह हो चुकी है और हवाई मार्ग से लोगों को निकालना ही एक उपाय है.

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