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साल में एक बार खुलते हैं इस मंदिर के कपाट… आज रात होंगे दर्शन, नेपाल से आईं थी प्रतिमा

मध्य प्रदेश की विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर के शिखर पर भगवान नागचंद्रेश्वर का बहुत प्राचीन मंदिर है, जहां भगवान नागचंद्रेश्वर के साथ ही भगवान की ऐसी दुर्लभ प्रतिमा है, जो कि नेपाल से यहां लाई गई थी. इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह मंदिर साल में सिर्फ एक बार ही खुलती है और वह भी 24 घंटे के लिए ही खोली जाती है.

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भगवान नागचंद्रेश्वर के मंदिर में देश विदेश से श्रद्धालु भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन करने के लिए उज्जैन पहुंचते हैं. इस मंदिर के पट इस साल 28 जुलाई, सोमवार की रात 12 बजे पूजा अर्चना के बाद खोले जाएंगे. श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़े के महंत विनीत गिरी और प्रशासनिक अधिकारी मंदिर के पट खोलने के बाद रात को त्रिकाल पूजा करेंगे और फिर रात से ही दर्शनों का सिलसिला शुरू हो जाएगा.

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भगवान नागचंद्रेश्वर के मंदिर में देश विदेश से श्रद्धालु भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन करने के लिए उज्जैन पहुंचते हैं. इस मंदिर के पट इस साल 28 जुलाई, सोमवार की रात 12 बजे पूजा अर्चना के बाद खोले जाएंगे. श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़े के महंत विनीत गिरी और प्रशासनिक अधिकारी मंदिर के पट खोलने के बाद रात को त्रिकाल पूजा करेंगे और फिर रात से ही दर्शनों का सिलसिला शुरू हो जाएगा.

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श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़े के महंत विनीत गिरी ने बताया कि यह प्रतिमा अत्यंत दुर्लभ है, जिसे नेपाल से यहां लाया गया था. प्रतिमा 11वीं शताब्दी की बताई जाती है, जिसमें भगवान शिव के मस्तक पर नागचंद्रेश्वर सात फनों से सुशोभित हैं. इस प्रतिमा में भगवान शिव, माता पार्वती अपने वाहन नंदी और सिंह के साथ विराजमान हैं. जबकि प्रतिमा में भगवान श्री गणेश, भगवान कार्तिकेय, सूर्य, चंद्रमा भी में देखे जा सकते हैं.

श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़े के महंत विनीत गिरी ने बताया कि यह प्रतिमा अत्यंत दुर्लभ है, जिसे नेपाल से यहां लाया गया था. प्रतिमा 11वीं शताब्दी की बताई जाती है, जिसमें भगवान शिव के मस्तक पर नागचंद्रेश्वर सात फनों से सुशोभित हैं. इस प्रतिमा में भगवान शिव, माता पार्वती अपने वाहन नंदी और सिंह के साथ विराजमान हैं. जबकि प्रतिमा में भगवान श्री गणेश, भगवान कार्तिकेय, सूर्य, चंद्रमा भी में देखे जा सकते हैं.

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28 जुलाई की रात 12 बजे जैसे ही भगवान नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट खोले जाएंगे. वैसे ही मंदिर में पूजा अर्चना भी शुरू हो जाएगी. रात को 12 बजे होने वाली त्रिकाल पूजा के बाद 29 जुलाई मंगलवार की दोपहर 12 बजे श्री पंचायती महा अखाड़े और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में भगवान की पूजा अर्चना की जाएगी.

28 जुलाई की रात 12 बजे जैसे ही भगवान नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट खोले जाएंगे. वैसे ही मंदिर में पूजा अर्चना भी शुरू हो जाएगी. रात को 12 बजे होने वाली त्रिकाल पूजा के बाद 29 जुलाई मंगलवार की दोपहर 12 बजे श्री पंचायती महा अखाड़े और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में भगवान की पूजा अर्चना की जाएगी.

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इसके बाद शाम को फिर श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी और पुरोहित भगवान नागचंद्रेश्वर की पूजा अर्चना कर विशेष आरती करेंगे. 29 जुलाई की रात 12 बजे तक मंदिर में दर्शनों का सिलसिला इसी तरह जारी रहेगा. इसके बाद फिर से भगवान की पूजा अर्चना होगी और श्री नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट एक साल के लिए बंद कर दिए जाएंगे. 

इसके बाद शाम को फिर श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी और पुरोहित भगवान नागचंद्रेश्वर की पूजा अर्चना कर विशेष आरती करेंगे. 29 जुलाई की रात 12 बजे तक मंदिर में दर्शनों का सिलसिला इसी तरह जारी रहेगा. इसके बाद फिर से भगवान की पूजा अर्चना होगी और श्री नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट एक साल के लिए बंद कर दिए जाएंगे.

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