जयपुर : राजधानी जयपुर से ठगी का नेटवर्क चला रहे साइबर ठगों के तार चीन में बैठे साइबर अपराधियों से जुड़े हैं. लोगों से ठगी की रकम को कैश करवाने के बाद साइबर अपराधी क्रिप्टो करेंसी (यूएसडीटी) खरीद रहे थे. जयपुर की श्याम नगर थाना पुलिस ने ऐसे ही एक गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए चार साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है. अब पुलिस इस गिरोह के मास्टरमाइंड की तलाश में जुटी है. पड़ताल में सामने आया है कि इस गिरोह ने 4-5 महीनों में करीब पांच करोड़ रुपए की साइबर ठगी की है. दरअसल, चीन में चल रहे कॉल सेंटर से सोशल मीडिया के जरिए निवेश के नाम पर ठगी की जाती है. यह गैंग ठगी की रकम को ट्रांसफर करने के लिए बैंक अकाउंट मुहैया करवाती है.
नकदी और बैंक खातों के दस्तावेज जब्त : जयपुर (दक्षिण) डीसीपी राजर्षि राज ने बुधवार को प्रेस वार्ता में बताया कि श्याम नगर थाना पुलिस ने जयपुर में अजमेर रोड पर एक फ्लैट में दबिश दी. इस दौरान जोहड़ों जोहरों की ढाणी (जैसलमेर) निवासी सदासुख विश्नोई, बड़ी जोड़ी (जयपुर) निवासी अंकू चंदोलिया, पालों की ढाणी (जयपुर) निवासी कमल कुमार कुमावत और रामचंद्रपुरा (जयपुर) निवासी कमलेश वर्मा को गिरफ्तार किया है. फ्लैट से 7.70 लाख रुपए नकद, तीन बैंक पास बुक, 23 चेक बुक, 6 एटीएम किट, 28 एटीएम कार्ड, दस मोबाइल सिम, चार किरायानामा के दस्तावेज मिले हैं.
अन्य राज्यों से भी जुड़े हैं तार : उन्होंने बताया कि इस गिरोह के बदमाशों के खिलाफ देश के अन्य राज्यों में भी साइबर ठगी की 19 शिकायतें दर्ज हैं. ये राजस्थान के अलावा महाराष्ट्र, बिहार, झारखंड में साइबर ठगी करने वाले गिरोहों को बैंक खाते मुहैया करवाते हैं. उन्होंने बताया कि गिरफ्तार चार आरोपियों में दो साइबर ठगी गिरोह के बदमाश हैं, जबकि दो खाताधारक हैं, जो खाते किराए पर देते हैं. गैंग का सरगना ठगी की रकम को कैश करवाकर क्रिप्टो करेंसी (यूएसडीटी) खरीदकर चीन भेजता है.
ठगी की रकम को सफेद करने की तैयारी : उन्होंने बताया कि इस गैंग के बदमाशों ने किराएनामे के आधार पर एक फर्म भी रजिस्टर्ड करवाने की तैयारी कर रखी थी. इसका नाम प्रॉक्सीज आर्टिफिशियल प्राइवेट लिमिटेड कंपनी है. पड़ताल में सामने आया है कि इस कंपनी के जरिए साइबर फ्रॉड की रकम को सफेद करने की साजिश थी. इस गैंग के बदमाश हर एक-दो महीने में अपना ठिकाना बदल लेते हैं. उन्होंने कहा कि धनशोधन का मामला सामने आने पर प्रवर्तन निदेशालय को भी इस गैंग से जुड़ी जानकारी साझा की जाएगी.
ग्रामीणों के बैंक खाते लेते हैं किराए पर : डीसीपी राजर्षि राज ने बताया कि गैंग का मुख्य सरगना तेजरासर (बीकानेर) निवासी सुनील जाखड़ है, जिसका चीन के साइबर ठगों से संपर्क है. उसने साइबर ठगों को बैंक खाते किराए पर मुहैया करवाने के लिए गैंग बना रखी है. इस गैंग में अलग-अलग लोगों को अलग-अलग काम बांट रखा है. इस गैंग से जुड़े बदमाश ग्रामीण अंचल के लोगों को 10-30 हजार रुपए हर महीने देने का लालच देकर बैंक खाता किराए पर लेते हैं.
बैंक खाते के दस्तावेज रखते हैं अपने पास : इस गिरोह के बदमाश बैंक खाते से जुड़ी मोबाइल सिम, दस्तखत की हुई चेकबुक और एटीएम कार्ड लेकर अपने पास रखते हैं. चीन में बैठे ठगों के कहने पर गैंग का सरगना सुनील जाखड़ ठगी की रकम से यूएसडीटी (क्रिप्टो करेंसी) खरीदता और चीन भेजता है. इसके बदले मोटा कमीशन रखता है.
सोशल मीडिया के जरिए ठगी का खेल : पुलिस की पड़ताल में सामने आया है कि चीन में चल रहे कॉल सेंटर से वाट्सएप और टेलीग्राम जैसे सोशल मीडिया एप्लिकेशन पर बड़ी संख्या में निवेश के नाम पर ग्रुप बनाए हुए हैं. भारत के लोगों को लिंक भेजकर इन ग्रुपों में जोड़ा जाता है. इसके बाद शेयर बाजार और प्रॉपर्टी में मोटे मुनाफे का झांसा देकर निवेश करवाया जाता है. निवेश के नाम पर रकम बैंक खातों में जमा करवाई जाती है. इसके बाद कुछ समय तक मुनाफा दिखाया जाता है और बाद में ठगी की वारदात को अंजाम दिया जाता है.




















