उदयपुर शहर शुक्रवार रात उस वक्त दहल उठा, जब 55 वर्षीय आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अंजुबाला ने जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली। मौत से ठीक पहले महिला ने एक वीडियो रिकॉर्ड किया, जिसमें उसने महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों पर मानसिक प्रताड़ना और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए।
वीडियो में अंजुबाला ने कहा कि उससे डेढ़ लाख रुपए की मांग की जा रही थी और जब उसने रकम नहीं दी, तो नौकरी से हटाने की धमकी दी गई। महिला ने वीडियो में खुद को प्रताड़ित किए जाने का जिक्र करते हुए आत्महत्या को मजबूरी बताया।
यह चौंकाने वाली घटना उदयपुर के धानमंडी थाना क्षेत्र स्थित देहलीगेट हनुमान मंदिर के पास हुई। जहां शुक्रवार रात करीब 10 बजे अंजुबाला ने जहर खाकर बेटे को फोन किया और अपनी हालत बताई।
अफसरों की करतूत वीडियो में बेनकाब
सुसाइड से पहले बनाए गए वीडियो में अंजुबाला ने साफ कहा— “अब मुझसे बर्दाश्त नहीं होता, अधिकारियों ने मानसिक रूप से तोड़ दिया है… मैं अपनी जान दे रही हूं।”
परिजनों ने यह वीडियो पुलिस को सौंपा है। वीडियो में अंजुबाला स्पष्ट रूप से अधिकारियों के नाम लेते हुए कहती है कि उसे परेशान किया गया, धमकाया गया और जबरन इस्तीफे के लिए दबाव बनाया गया।
डेढ़ लाख की डिमांड और धमकी
मृतका के बेटे अनमोल दलाल ने पुलिस को बताया कि विभाग के अधिकारी — अतिका अहमद, शारदा बंशीवाल, जया वीरवाल और दिनेश मीणा — उसकी मां पर दबाव बना रहे थे।
उन्होंने मां से साफ कहा था कि यदि नौकरी बचानी है तो डेढ़ लाख रुपए दो, वरना किसी और को तुम्हारी जगह लगा देंगे। अनमोल ने कहा कि मां काफी दिनों से तनाव में थी और कई बार अपनी परेशानी उसके साथ साझा कर चुकी थी।
बुआ-भतीजी की जोड़ी बनी ‘टॉर्चर टीम’: बेटी का बयान
मृतका की बेटी निशा पितलिया ने भी अधिकारियों पर संगीन आरोप लगाए। निशा ने बताया कि आरोपी अधिकारी जया वीरवाल और शारदा बंशीवाल आपस में बुआ-भतीजी हैं और विभाग में सुपरवाइजर पद पर हैं।
उन्होंने कहा— “मेरी मां को ये दोनों लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित करती थीं। इन लोगों ने मिलकर मां को हटाकर किसी अपने आदमी को नौकरी देने का प्लान बनाया था। दिनेश मीणा और अतिका अहमद भी इस साजिश में शामिल थे।”
नौकरी के पैसों से चलता था घर, सिस्टम ने छीन ली ज़िंदगी
अंजुबाला अपने परिवार की इकलौती कमाने वाली सदस्य थीं। पति और बेटा बेरोजगार हैं। तीन बेटियों की शादी हो चुकी है। ऐसे में मां के वेतन से ही घर का खर्च चलता था।
बेटी निशा ने कहा— “मां की नौकरी ही हमारी रीढ़ थी, जिसे अधिकारियों ने झूठे आरोपों, डराने-धमकाने और पैसों की डिमांड कर छीनने की कोशिश की। इससे परेशान होकर उन्होंने जान दे दी।”
गुस्साए परिजनों का विरोध, शव उठाने से इनकार
अस्पताल में शुक्रवार देर रात तक माहौल तनावपूर्ण बना रहा। अंजुबाला के परिजनों ने एमबी हॉस्पिटल की मोर्चरी में शव लेने से इनकार कर दिया।
उनका कहना है कि जब तक आरोपी अधिकारियों की गिरफ्तारी नहीं होती, वे शव नहीं उठाएंगे। परिजनों ने कहा कि मां ने जिन लोगों के नाम वीडियो में लिए हैं, वे अब तक खुले घूम रहे हैं — यह न्याय नहीं, क्रूर मजाक है।
विधायक पहुंचे मौके पर, न्याय की मांग तेज
घटना की सूचना मिलने पर उदयपुर शहर के विधायक ताराचंद जैन भी अस्पताल पहुंचे। उन्होंने परिजनों से बात की और प्रशासन से जांच के आदेश देने की मांग की।
पुलिस ने परिजनों को शांत करने की कोशिश की, लेकिन लोग गिरफ्तारी की मांग पर अड़े रहे।
पुलिस ने दर्ज किया केस, जांच शुरू
धानमंडी थाना पुलिस ने बेटे अनमोल दलाल की रिपोर्ट पर मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस ने महिला का मोबाइल और वीडियो कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।
हालांकि, अब तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
सवालों के घेरे में पूरा विभाग
यह मामला महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। क्या वाकई अधिकारियों द्वारा कार्यकर्ताओं से पैसे लेकर नियुक्तियों का खेल चल रहा है? क्या कमजोर तबके की महिलाएं इस सिस्टम का आसान निशाना बन चुकी हैं?
अब पूरा शहर जानना चाहता है — अंजुबाला की मौत के लिए कौन ज़िम्मेदार है




















