जयपुर. राजस्थान में मानसून की सक्रियता अब तेज़ होती जा रही है और इसके असर से बीते 24 घंटे में कई जिलों में भारी बारिश दर्ज की गई है. कोटा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, उदयपुर, टोंक और बूंदी जैसे जिलों में मध्यम से लेकर तेज बारिश ने जहां गर्मी से राहत दी, वहीं कई जगह जलभराव और सड़कों पर बहते पानी ने जनजीवन को भी प्रभावित किया है. कोटा में 95 मिमी, डूंगरपुर में 90 मिमी, प्रतापगढ़ में 80 मिमी, उदयपुर में 75 मिमी, टोंक में 70 मिमी और बूंदी में 65 मिमी बारिश दर्ज की गई है. लगातार हो रही बारिश के चलते कोटा, चित्तौड़गढ़, झालावाड़, बारां, डूंगरपुर और प्रतापगढ़ जिलों में आम जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया है.
तेज बारिश के इस सिलसिले को देखते हुए मौसम विभाग ने प्रदेश के 16 जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है. इनमें कोटा, बारां, झालावाड़, बूंदी, टोंक, सवाई माधोपुर, चित्तौड़गढ़, राजसमंद, भीलवाड़ा, उदयपुर, प्रतापगढ़, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, सिरोही, जालोर और पाली शामिल हैं. इन जिलों में भारी से अति भारी वर्षा की चेतावनी दी गई है. वहीं, जयपुर, दौसा, अलवर, अजमेर, नागौर, बीकानेर, झुंझुनूं, सीकर, भरतपुर, हनुमानगढ़, चूरू, गंगानगर और करौली जैसे 12 जिलों में येलो अलर्ट जारी करते हुए हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई गई है.
इन जिलों में ऑरेंज अलर्ट
सात जुलाई को पूर्वी राजस्थान के कोटा, बारां, बूंदी, झालावाड़, भीलवाड़ा, टोंक, सवाई माधोपुर, करौली, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, उदयपुर, प्रतापगढ़ और चित्तौड़गढ़ जिलों के लिए एक बार फिर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है. वहीं पश्चिमी राजस्थान के पाली, सिरोही और जालोर जिलों में भी सात जुलाई को भारी वर्षा की चेतावनी दी गई है. हालांकि जैसलमेर और बाड़मेर में केवल हल्की बारिश की संभावना बनी हुई है.
अलर्ट मोड पर प्रशासन
तेज बारिश के कारण राज्य के कई हिस्सों में नदियों-नालों में पानी की आवक बढ़ गई है, जिससे कई मार्ग बाधित हो चुके हैं. प्रशासन ने अलर्ट मोड पर रहकर SDRF और अन्य राहत दलों को तैयार रहने के निर्देश दिए हैं. जलभराव, मकानों को नुकसान और बिजली गिरने की घटनाएं भी सामने आई हैं, जिससे सतर्कता और सावधानी की आवश्यकता और बढ़ गई है.
कहीं पर राहत तो कहीं पर आफत
राजस्थान में बारिश ने कहीं यह खुशियों की बारिश बनकर बरसी तो कहीं मातम और तबाही की बौछार लेकर आई. श्रीगंगानगर जिले के श्रीविजयनगर में एक मासूम की जान चली गई, वहीं बारां में सड़क हादसे में एक ही परिवार के चार सदस्य जिंदगी की रफ्तार से हमेशा के लिए दूर हो गए. दूसरी तरफ टोंक जिले से बीसलपुर बांध के भरने की खबर ने उम्मीदों को नया पानी दिया है.
झुंझुनूं में बारिश ने खोली प्रशासन की पोल
झुंझुनूं जिले के सुलताना कस्बे में शनिवार को जमकर बारिश हुई. आसमान से बरसी मेघों की फुहारें जहां एक ओर लोगों को गर्मी और उमस से राहत दे गईं, वहीं दूसरी ओर नगर पालिका की व्यवस्थाओं की पूरी पोल खोल दी. बारिश के बाद कस्बे के प्रमुख मार्गों और बाजार इलाकों में भारी जलभराव देखने को मिला, जिससे लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ी. बस स्टैंड, चिड़ावा रोड, टेकड़ा रोड जैसे मुख्य इलाकों में पानी भर गया. जलभराव के कारण दुकानों में पानी घुस गया और दुकानदारों को सामान बचाने में खासी मशक्कत करनी पड़ी.
श्रीविजयनगर में गिरी छतें, मासूम की मौत
श्रीगंगानगर जिले के श्रीविजयनगर में तेज बारिश और बिजली गिरने से दो मकानों की छतें भरभरा कर गिर गईं. इन मकानों में रह रहे परिवार के छह लोग हादसे का शिकार हो गए. पांच साल की बच्ची मनु की मौके पर ही मौत हो गई जबकि बाकी पांच लोग घायल हो गए. हादसे की जानकारी मिलते ही पुलिस और राहत दल मौके पर पहुंचे और घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया. क्षेत्र में कई बिजली के पोल और पेड़ भी गिर गए हैं जिससे विद्युत आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है.
बीसलपुर बांध के बढ़ते जलस्तर से राहत
टोंक जिले से बीसलपुर बांध को लेकर अच्छी खबर है. बांध में लगातार पानी की आवक बनी हुई है. रविवार सुबह 6 बजे जलस्तर 313.77 आरएल मीटर तक पहुंच गया. यह बांध की पूर्ण भराव क्षमता 315.50 आरएल मीटर के काफी करीब है. पिछले 12 घंटों में 4 सेंटीमीटर की आवक दर्ज की गई है. त्रिवेणी नदी इस वक्त 3.20 मीटर के उफान पर बह रही है. यह बांध जयपुर, टोंक और अजमेर की जीवन रेखा माना जाता है और इस बारिश से लोगों को लंबे समय की राहत की उम्मीद है.
बारां में हादसा, एक ही परिवार के चार लोगों की मौत
बारां जिले में एनएच-27 पर एक दर्दनाक सड़क हादसे में एक ही परिवार के चार लोगों की मौत हो गई. लखनऊ से कोटा जा रही कार रात के समय गड्ढों से बचने के प्रयास में अनियंत्रित होकर पलट गई. हादसा इतना भीषण था कि सभी चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई. पुलिस ने शवों को कार से बाहर निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. हादसे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या हम अब भी सड़कों की मरम्मत और सुरक्षा को हल्के में ले रहे हैं.




















