जयपुरः जयपुर अपनी ऐतिहासिक इमारतों, किलो-महलों के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है साथ ही यहां के लोगों में कला को लेकर भी अनोखा जुड़ाव रहता है, यहां के कलाकार दुनियाभर में अपनी कला का जादू बिखेरते हैं और लोग भारत के अलग-अलग राज्यों से भी लोग अपनी खास कलाओं को लेकर यहां पहुंचते हैं। जिन्हें लोग खूब पंसद करते हैं। ऐसे ही जयपुर के जवाहर कला केंद्र में चल रहे शिल्पम आर्ट एंड क्राफ्ट फेयर में अलग-अलग राज्यों से आए खास आर्टिस्ट जो अपने राज्य की खास पेंटिंग्स को लेकर यहां आए हैं। जिन्हें लोग खरीदते हैं और बेहतरीन पेंटिंग्स की जयपुर में खूब डिमांड रहती है। ऐसे ही एक फेयर में उड़ीसा भूवनेश्वर से आए आर्टिस्ट बोमन अली जो उड़ीसा की खास पट्टचित्र चित्रकला शैली में बनने वाली खास पेंटिंग इसकी दुनियाभर में डिमांड रहती है। local-18 उड़ीसा की खास पेंटिंग को लेकर बोमन अली से बात की तो वह बताते हैं कि यह पेंटिंग उड़ीसा की पारंपरिक कला की खास पेंटिंग है, जो खासतौर पर केले के पत्ते पर बनाई जाती है, बोमन बताते हैं यह अनोखी कला हजारों वर्ष पुरानी है रामायण सहित भारत के प्राचीन ग्रंथों को केले के पत्ते पर ही लिखा गया था, यह कला भी उसी से जुड़ी है।
आपको बता दें उड़िसा की खास पट्टचित्र चित्रकला एक जटिल और विस्तृत कला है जिसमें सबसे ज्यादा धार्मिक और पौराणिक विषयों को दर्शाया जाता है। जिसमें खासतौर पर भगवान जगन्नाथ, राधा-कृष्ण, और अन्य देवी-देवताओं की छवियां, साथ ही रामायण और महाभारत जैसे महाकाव्यों का वर्णन और छवियां उकेरी जाती हैं।
कैसे तैयार होती हैं पट्टचित्र चित्रकला की खास पेंटिंग
आपको बता दें केले के पत्तों का उपयोग ख़ासतौर पर दक्षिण भारत में सजावट और भोजन परोसने के लिए किया जाता है, साथ ही केले के पेड़ के अलग-अलग हिस्से से कई चीजें तैयार होती हैं उन्हीं में से एक केले के पत्तों से खास पेंटिंग जिसकी उड़िसा में पेंटिंग बनाने की विशिष्ट परंपरा वर्षों से चली आ रही है। आज भी उड़िसा की वर्षो पुरानी पट्टचित्र चित्रकला को लोग आज भी खूब पंसद करते हैं इसलिए उड़िसा में इस कला के कलाकार लगातार पेंटिंग बनाते हैं जिनकी डिमांड दुनियाभर में रहती है। बोमन बताते हैं की उड़िसा पेंटिंग में खासतौर पर पारंपरिक तरीकों से चित्रों को बिल्कुल बारिकी से केले के पत्तों पर उकेरा जाता हैं। केले के पत्ते की परत बेहद नाज़ुक और पतली होती हैं इसलिए उन पर पेंटिंग बनाना काफी मुश्किल होता है। केले के पत्ते पर इस खास पेंटिंग को बनाने के लिए बिल्कुल बारिकी तरिके से हाथों से हैंड विवीग की जाती हैं, साथ ही केले के पत्तों को फोल्ड किया जाता है जिसके साथ पेंटिंग भी फोल्ड होती हैं इस प्रकार इस खास पेंटिंग में तैयार होने वाली बड़ी से बड़ी पेंटिंग को भी को भी बिल्कुल छोटे रूप में फोल्ड किया जा सकता हैं। इसलिए लोग इस कला की पेंटिंग को खूब पंसद करते हैं और खरीदते हैं।
लाखों में होती हैं पट्टचित्र चित्रकला की पेंटिंग की कीमत
आपको बता दें उड़िसा की खास पट्टचित्र चित्रकला की पेंटिंग छोटे से लेकर बड़े आकार तक बनती है। जिन्हें लोग अपने घरों में सुंदर सजावट के लिए खरीदते हैं, बोमन बताते हैं की उड़िसा की इस खास पेंटिंग की कीमत सामान्य रूप से 500 रूपए से शुरू होती है और लाखों रूपए तक होती हैं, अभी फेयर में वह खुद 58 हजार की पेंटिंग लेकर आए हैं। लेकिन लोग सामान्य रूप से घरों में सजावट के लिए 5 से 10 हजार तक की ही पेंटिंग खरीदते हैं ज्यादा महंगी पेंटिंग सिर्फ VIP लोगों के लिए स्पेशल ऑडर के हिसाब से तैयार की जाती हैं। फेयर में लोगों के लिए छोटे से लेकर बड़े आकार की पेंटिंग उपलब्ध हैं जिन्हें लोग अपनी पंसद और बजट के हिसाब से खरीद सकते हैं, बोमन बताते हैं जयपुर में भारत के अलग-अलग राज्यों की पेंटिंग की खूब डिमांड रहती है इसलिए वह भी पहली बार जयपुर अपनी खास पेंटिंग कला को लेकर आए हैं और लोग उनकी पेंटिंग्स खरीद रहे हैं और खूब पंसद कर रहे हैं।




















