Responsive Menu

Download App from

Download App

Follow us on

Donate Us

ईरान की धमकी और रूस का सपोर्ट, भारत ने किस प्लानिंग को किया एग्जीक्यूट?

ईरान इजराइल वॉर चल रहा है और इस वॉर में अब अमेरिका भी कूद गया है. इन तमाम बातों के लिए भारत की सबसे बड़ी टेंशन कच्चे तेल की कीमतों को लेकर है. ये टेंशन लाजिमी भी है. क्योंकि भारत अपनी जरुरत का करीब 90 फीसदी कच्चा तेल इंपोर्ट करता है. भारत के कुल इंपोर्ट बिल में कच्चे तेल की हिस्सेदारी काफी बड़ी है. ऐसे में कच्चा तेल महंगा होता तो भारत को कई मोर्चों पर परेशानी का सामना करना पड़ेगा. जिसमें महंगाई, जीडीपी और रुपया काफी अहम है. कच्चे तेल की कीमतों में इजाफा होने से भारत में इन तीन मोर्चों पर सबसे ज्यादा जंग लड़ी जाती है.

ऐसे में ईरान ने होमुर्ज स्ट्रेट को बंद करने तक की धमकी भी दे दी है. जिसकी वजह से दुनिया के कई देशों को कच्चे तेल की सप्लाई रुक सकती है और कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिल सकता है. कुछ दिन पहले इराक के डिप्टी पीएम ने भी चेतावनी दी थी कि अगर ये युद्ध लंबा चला तो इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में 200 से 300 डॉलर पर भी जा सकती है.

Advertisement Box

ऐसे में भारत ने अपनी एक बड़ी प्लानिंग को एग्जीक्यूट कर लिया है. भारत ने अब रूस से कच्चे तेल की सप्लाई में इजाफा कर लिया है. भारत को रूस से कच्चे तेल को लेकर काफी समय से सपोर्ट मिल रहा है. वो भी तब जब रूस यूक्रेन वॉर में क्रूड ऑयल के दाम 135 डॉलर पर पहुंच गए थे और रूस पर कई अमेरिकी और यूरोपीय प्रतिबंध लग गए थे. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर इस मामले में किस तरह की जानकारी सामने आई है?

एग्जीक्यूट की प्लानिंग

इजरायल द्वारा ईरान पर हमले के बाद बाजार में आए उतार-चढ़ाव के बीच भारत ने जून में रूस से कच्चे तेल की खरीद बढ़ा दी है. भारत की जून में रूस से तेल खरीद पश्चिम एशिया के सप्लार्य सऊदी अरब और इराक से आयातित मात्रा से अधिक रही है. अमेरिकी सेना ने रविवार सुबह ईरान में तीन स्थलों पर हमला किया. वह इस युद्ध में सीधे इजरायल के साथ शामिल हो गया है. इजरायल ने 13 जून को सबसे पहले ईरानी परमाणु ठिकानों पर हमला किया था.

दो साल में सबसे ज्यादा सप्लाई

वैश्विक व्यापार विश्लेषक कंपनी केपलर के शुरुआती आंकड़ों से पता चलता है कि भारतीय रिफाइनरी कंपनियां जून में रूस से प्रतिदिन 20 से 22 लाख बैरल कच्चा तेल खरीद रही हैं. यह दो साल का सबसे ऊंचा आंकड़ा है. इसके साथ ही यह इराक, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और कुवैत से खरीदी गई कुल मात्रा से अधिक है. मई में रूस से भारत का तेल आयात 19.6 लाख बैरल प्रति दिन (बीपीडी) था. जून में अमेरिका से भी आयात बढ़कर 4,39,000 बीपीडी हो गया. पिछले महीने यह आंकड़ा 2,80,000 बीपीडी था. केपलर के अनुसार, पश्चिम एशिया से आयात के लिए पूरे महीने का अनुमान लगभग 20 लाख बैरल प्रतिदिन है, जो पिछले महीने की खरीद से कम है. दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक और उपभोक्ता देश भारत विदेशों से लगभग 51 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदता है, जिसे रिफाइनरी में पेट्रोल और डीजल जैसे ईंधन में बदला जाता है.

रूस से तेल क्यों खरीद रहा भारत?

भारत पारंपरिक रूप से पश्चिम एशिया से कच्चा तेल खरीदता रहा है. फरवरी, 2022 में यूक्रेन पर रूसी हमले के तुरंत बाद भारत ने रूस से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करना शुरू कर दिया था. इसका मुख्य कारण यह था कि पश्चिमी प्रतिबंधों और कुछ यूरोपीय देशों द्वारा खरीद से परहेज करने के कारण रूसी तेल अन्य अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क की तुलना में काफी सस्ते दाम पर उपलब्ध था. इसके कारण भारत के रूसी तेल आयात में नाटकीय वृद्धि देखी गई. कभी भारत का रूस से कच्चे तेल का आयात एक प्रतिशत से भी कम था. लेकिन यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद यह थोड़े से समय में ही बढ़कर 40-44 प्रतिशत तक पहुंच गया था.

Best Service Providers Near You
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एपल प्रमुख टिम कुक से आईफोन का निर्माण भारत में न करने को कहा है। क्या इसका असर देश के स्मार्टफोन उद्योग पर पड़ सकता है?

Aries Rashifal
मेष
taurus Rashifal
वृषभ
gemini Rashifal
मिथुन
cancer Rashifal
कर्क
leo Rashifal
सिंह
virgo Rashifal
कन्या
libra Rashifal
तुला
scorpion Rashifal
वृश्चिक
sagittarius Rashifal
धनु
capricorn Rashifal
मकर
aquarius Rashifal
कुंभ
pisces Rashifal
मीन
Advertisement Box

और भी पढ़ें