जयपुर. राजस्थान बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ का आज जन्मदिन है। हालांकि वे अपना जन्मदिन किसी शान-ओ-शौकत नहीं मनाते हैं लेकिन आज उन्हें बधाइयां देने वालों का तांता लगा हुआ है. मारवाड़ के पाली जैसे छोटे से जिले से निकलकर राजनीति में बड़ा नाम करने वाले मदन राठौड़ सादगी पसंद राजनेता हैं. पद और पावर होते हुए भी जमीन से जुड़े रहने वाले मदन राठौड़ राजनीतिक संतुलन और एकजुटता के पैरोकार हैं. पीएम नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के करीबी तथा पार्टी हाईमान के विश्वस्त सिपाही मदन राठौड़ की गिनती शांत, संतुलित और विवादों से दूर रहने वाले नेताओं में होती है.
पाली जिले के दो बार जिलाध्यक्ष रह चुके मदन राठौड़ आज बीजेपी की प्रदेश इकाई की कमान संभाल रहे हैं. मजबूत संगठनात्मक अनुभव वाले राठौड़ दो बार पाली के सुमेरपुर से विधायक रह चुके हैं. इनमें से एक बार सरकार में सक्रिय भूमिका निभाते हुए उपमुख्य सचेतक रहे. पार्टी में ओबीसी का प्रभावशाली चेहरा माने जाने वाले मदन राठौड़ का पार्टी ने बीते चुनाव में टिकट भले ही काट दिया हो लेकिन बाद में प्रदेश की कमान सौंपकर उनके प्रति अपना विश्वास दर्शाया है.
सांसद के तौर भी मनवाया काबिलियत का लोहा
आरएसएस की पृष्ठभूमि से आने वाले मदन राठौड़ आपातकाल में भी सक्रिय रह चुके हैं. पार्टी ने उनको बीते वर्ष राज्यसभा सांसद बनाकर संसद भेजा तो उन्होंने वहां भी अपनी काबलियत का लोहा मनवाया. इसका परिणाम यह हुआ कि उन्हें संसद रत्न के रूप में चुना गया. जमीनी कार्यकर्ताओं से जुड़ाव रखने वाले राठौड़ आज भी उसकी सादगी से उनसे मिलते हैं जितनी सादगी से प्रदेशाध्यक्ष बनने से पहले मिलते थे. वे पार्टी के प्रदेश इकाई के नेता रूप में अपनी अलग छवि के लिए जाने जाते हैं.
राठौड़ की संगठन में सक्रियता उनके किसी बड़े लक्ष्य को इंगित कर रही है
‘डिसिप्लिन्ड’ नेता की छवि वाले मदन राठौड़ अब राजस्थान में संगठन को पैना बनाने में जुटे हैं. सरकार के साथ ही वे पूरी तरह से अलर्ट मोड पर नजर आते हैं. गांव-गांव, ढाणी-ढाणी के प्रत्येक घर तक पार्टी की पहुंच को बनाने के लिए वे लगातार सक्रिय हो रहे हैं. राजनीति के जानकार बताते हैं कि राठौड़ की संगठन में सक्रियता उनके किसी बड़े लक्ष्य को इंगित कर रही है. यह उनकी संगठन के साथ सत्ता में चलबल को भी दर्शाता है. पार्टी मदन राठौड़ के जरिये सूबे में सोशल इंजीनियरिंग करने में जुटी है. राठौड़ भी उसके विश्वास पर खरा उतरने के लिए कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं. विधानसभा उपचुनाव में पार्टी की जीत का परचम लहरा कर वे अपनी नेतृत्व क्षमता को दिखा चुके हैं.




















